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प्रेम जब समिष्टि से हो जाये तो क्या होता है?


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3757 days 22 hrs 17 mins ago By Bhakti Rathore
 

atam gyan

3769 days 6 hrs 25 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... मुक्त अवस्था को प्राप्त व्यक्ति में ही समिष्टि का भाव उत्पन्न होता है यनि समिष्टि के भाव में स्थित व्यक्ति संसारिक कर्म बन्धन से मुक्त हो जाता है।

3769 days 16 hrs 43 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

किसी जीव को समष्टि से प्रेम तभी हो सकता है जब उसकी ओरा इतनी व्यापक हो जाए की उसे कोई दूसरा नज़र ही ना आये | और जब ऐसा हो जाता है तो उस जीव के अंतर से दूसरे का भेद समाप्त हो जाते हैं सिर्फ वो ही रह जाता है | इस बात को ऐसे समझ सकते हैं जैसे महावीर जी जब कीड़ों से अपने को बचा कर चलते तो इसलिए नहीं की कहीं जीव हत्या ना हो जाए वरन वो इसलिए बचते थे की वो अपने पर ही पैर कैसे रख सकते हैं क्योंकि वो इस स्थिति में थे की वहाँ दूसरा नहीं था सिर्फ वो ही थे | बस दूसरा कोई नहीं रहता ये ही होता है समिष्टि से प्रेम हो जाने के बाद | राधे राधे

 
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