Theme :
Home
Granth
eBook
Saint
Yatra
Shanka
Health
Pandit Ji

लोग भगवान शिवजी के प्रसाद के रूप में अफीम खातें हैं| क्या मुझे खाना चाहिए? और यदि यह सही नहीं है तो मैं बाकि लोगों को कैसे समझाउं?


  Views :1972  Rating :0.0  Voted :0  Clarifications :8
3757 days 23 hrs 26 mins ago By Bhakti Rathore
 

nahi khana cheiye unhone isley khei thi ki wo ye kahan chate the ki dekho ye cheej achi nahi sief mujhe he apran kero ye mere ley he aur apne guri ki shran me raho ye samghaao unhe

3763 days 22 hrs 5 mins ago By Waste Sam
 

radhey radhey.. shivji ke vishay mein iss prakar ka prashan pad kar mein ruk gayi aur apne vichar dene ke liye vivash ho gayi...kis ne kaha bhagwan shankar afim khate hai.... satya kya hai yeh samjhe: satya hai bhagwan ne jab kaal koot vish peeya tha tabse unhe bahut garmi lagne lagi, chandrama dharan karne se, ganga maa dharan karne se, kailash par jaane se bhi garmi kum nahi hue tab bhagwan ne maa parvati ko kaha ke mujhe aur vish doo- kyonki ayurved mein vish ka ilaaz aur vish khana hee hai.. toh maa parvati boli ke vish nahi hai mere pass, toh bhagwan bole ke vish girne se yeh dhatoore, bhang ped ho gaye hai jo vish hee hai.. isliye bhagwan shiv uss vish ko peete hai... yadi koi bhagwan shiv ke samanyata karna chahata hai toh mein kehte hoon afim nahi dhatoora khaoo, vish ka paan karo tab koi bhagwan shiv ke tulya ho payega... jai shri radhey

3768 days 22 hrs 43 mins ago By Vipin Sharma
 

Bhagwan ne sabko dimaag diya h achhe bure ki pahchaan k liye...

3769 days 22 hrs 18 mins ago By Avichal Mishra
 

pahle hamain yeh samjhna hoga; ki log afeem kyon; khate hain... jaise ki hamare upnisadon ke purv sanhitaon main kalpit hai ki, Markandey rishi; ko bhi grahast jeevan ko samjhne ke liye grahast jeevan main jaana pada tha; Mere anubhaw ke anusaar log afeem sahit sabhi naseele pdarth aanand ke liye hi khaate hain... Aanand swapn main bhi hai; lekin wah hota chatik; Aaap koi bhi Nasila padarth kyon na kha lein; uska prbhaw khatam jaroor hota hai; kaaran ke padharth hai to kaal main jaane ke ley; Lekin Prabu bhakti; athwa unhein hamesha hamare leye samjnana aur sada hamare paas mahsoos karna; kabhi bhi na khatm hone wala anand hai; To isi ko kyon na kar apnaya jae... Jai... Jai.... Shri Radhe....

3770 days 17 hrs 44 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... भगवान शिव तमोगुण के नियन्ता है। किसी भी प्रकार का नशा व्यक्ति के अन्दर तमोगुण उत्पन्न करता है। तमोगुण की प्राधनता के कारण ही व्यक्ति का अधोपतन होता है।.... भगवान शिव निरन्तर समाधि में रहकर राम नाम का जप करते हैं इस कारण सदैव सतोगुण में स्थित रहते हैं। भगवान शिव हमें शिक्षा देते हैं कि निरन्तर भगवान का जाप करने से तमोगुण भी सतोगुण में परिवर्तित हो जाता है।.... संसार में न तो कोई वस्तु सही होती है और न ही कोई वस्तु गलत होती है।....... जो भी वस्तुऎं भगवान के भजन में सहायक होती है वह सभी वस्तुऎं सही होती हैं और जो वस्तुऎं भगवान के भजन में सहायक नहीं होती हैं वह सभी वस्तुऎं गलत ही होती है।

3770 days 19 hrs 43 mins ago By Pradeep Pal
 

bhole baba to khud param brahm hai..... wo kya karte hai or kya nahi ye ham sadharan log nahi samjha sakte.... jaise ek udharan se samjhiye... ganga nadi hai usme kai nadi,nale akar milate hai to wo kya apavita ho jati hai?? nahi na! or fir ham usi ganga ji ka thoda sa jal lete hai... or fir usme akar koi sukar muh mar de to kya wo pine yogya hai nahi na...... kyoki nadia swaym me brahm hai wo apvita or dushit nahi ho sakati par thoda jal ushi nadi ka wo apavitra ho jata hai.... bus thik usi tarah.. ham, tum... ishaver ansh hai isliye aisha karenge to apavita honge.... par jo khud ishawar hai or bhamh hai wo aisha karne se apvitra nahi hote.... hare krishn

3770 days 23 hrs 39 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

देखा जाए तो इस संसार की हर वस्तु प्रभु के द्वारा ही निर्मित है और जो उसने बनायी है वो उसका ही प्रशाद है | पर क्या हर चीज या वस्तु उसने सबके लिए बनायी है | भगवान् शिव ने विष कंठ में धारण किया क्या हम कर सकते हैं, नहीं ना | ये हमारा मन है जो हमें भाता है उसे हम प्रशाद कह कर स्वीकार करने की कोशिश करते हैं | हर जीव के लिए उसने उस जीव की प्रकृति के अनुसार वस्तु बनायी है उसे वो ही वस्तु ग्रहण करनी चाहिए | भगवान् शिव कहते हैं कि अपने मन का मंथन करो उसमे से जो भी विष और वासना का नशा निकले उसे मुझे दे दो और जो अमृत निकले उसे जीव ग्रहण कर ले | ये अफीम भांग धतुरा ये हमारे विषयों के विष के सामान हैं और शिव इन सबको लेकर जीव को शुद्ध होने का अवसर देते हैं | ना कि इन सब वस्तुओं को ग्रहण करने का | शिव समर्थ हैं इन विषयों को कुंद करने में | जीव को लाभान्वित करने के लिए ही वो कहते हैं ये विषैली वस्तुए मुझे चढ़ा दो | लेकिन कुछ नशे के आदि लोग इन चीजों को प्रशाद कह कर भोगने का भ्रम पैदा करते हैं अपने को तो खराब करते ही हैं और दूसरो को भी भ्रम में डालते हैं | साधक को हमेशा इन भ्रमों से बच कर गुरु के निर्देशन में रहना चाहिए | राधे राधे

3771 days 37 mins ago By Gulshan Piplani
 

क्या आप कोई भी कार्य यह देख या सुन कर कर सकते हैं की लोग क्या करते हैं| तो सबसे पहले ये सोचना पड़ेगा कि क्या संसार के सब लोग अफीम खाते हैं| अगर नहीं तो आपको अपने गुणों के और अपनी पृकृति के अनुसार और अपने संस्कारों के अनुसार ही यह निर्णय लेना पड़ेगा| जिसको जिस वस्तु को ग्रहण करने में रस मिलता है वोह उसमें ही रस प्राप्त करता है| वैसे किसी को भी कुछ भी फर्क नहीं पड़ने वाला कि कोई क्या खाए| अपने लोग भी १००-५० बार बोल कर चुप हो जाते हैं| दरअसल शिव प्रसाद यह है कि ध्यान को माया से विकेन्द्रित कर उसकी भक्ति में लीन हो जाना यही भगवान् शिव का असली प्रसाद है परन्तु जब अतिपय लोग या असाधु ऐसा नहीं कर पाते तो वह गाफिल होने हेतु यह मार्ग अपनाते हैं और अफीम जैसी वस्तु तो भगवान् शिव का प्रसाद बता लोगों को भ्रमित करते रहते हैं|

 
Tags :
Radha Blessings



Click here to know more about Radha Blessings
Popular Article
Popular Opinion
Latest Bhav



Today Opinion Topic

हम अधिक अनुशासित कैसे बने?

Radhakripa on Mobile

Guru/Gyani/Artist
DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
Copyright © radhakripa.in>, 2010. All Rights Reserved
You are free to use any content from here.