Theme :
Home
Granth
eBook
Saint
Yatra
Shanka
Health
Pandit Ji

Indriyon Per Vash Kaise Kare?

Hamari Indriya He Hamare Ache Aur Bure Karyon Ka Karan Hai,Jiski Indriyan Asantulit Hain Wo Bhogi Aur Jiski Santulit Hai Wo Yogi Kehlata Hai,So Friends Please Tell Me Bhogi Se Yogi Kaise Bane?

  Views :2283  Rating :0.0  Voted :0  Clarifications :8
3772 days 30 mins ago By Gulshan Piplani
 

मैं यहाँ अपनी पुस्तक का एक दोहा प्रस्तुत करना चाहूँगा: रथी आत्मा, रथ शरीर, बुद्धि को सारथि मान| विषय चारा इन्द्रिय घोड़ों का, मन को लगा लगाम||

3772 days 35 mins ago By Gulshan Piplani
 

आपने अपनी बात का जवाब स्वम दे दिया है| आपके अनुसार जब इन्द्रियां ही भोगी और योगी होने का कारन हैं तो उनको ही कण्ट्रोल करना होगा न| पर मैं थोडा सा इसको अलग ढंग से बताना चाहूँगा| सोचें इन्द्रियाँ एक केमरे का कार्य कर रही हैं तो केमरा भोगी कैसे हो सकता है भोगी तो मन है जो बुद्धि को साथ मिलाकर उसको संचालित कर रहा है| तो इसका मतलब हुआ की इन्द्रियाँ स्वम वशीभूत हैं तो जो स्वम किसी और के वशीभूत है वोह भोगी कैसे हो सकता है| तात्पर्य आपको मन को वश में करना है नाकि इन्द्रियों को|

3772 days 1 hrs 6 mins ago By Avichal Mishra
 

indriyon ka santulan man se hota; aur man ka budhi se; atah: budhi sarbopari hai; jab tum budhi ko santulit kar loge to krmsah: man, indriyan; sabhi santulit hoti chali jaingi. Ab sawaal aata hai ki budhi ko kaise sanulit kiya jai; Iske liye dhyan karo; dhyan kiska apna; aaramb karo prabhu ke chintan se; sote; jagte; chalte; sonchte; udte; baidte; har samay; dhyan main bhi... yahi sarl tarika hai; jo main prabhu ki kripa se apnane ki kosis kar raha hon... jai... jai... shri radhe...

3772 days 1 hrs 12 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

भोगी कौन ? जिसकी इन्द्रियाँ बाह्य विषयों की और दौड़ती है वो भोगी है और जिसकी इन्द्रियाँ अंतर में दौड़ती हैं वो योगी है | संयम से मन को वश में करते हुए इन्द्रियों को बाह्य विषयों की तरफ जाने से रोका जा सकता है | कहना आसान है पर करना उतना ही मुश्किल | क्योंकि अर्जुन भी गीता में श्री कृष्ण से कहते हैं की मन बड़ा चंचल है इसको रोकना तो ऐसा है जैसे हवा को बांधना | इस पर श्री कृष्ण ने कहा है कि अभ्यास और वैराग्य से ही ये मन बंध सकता है | अब मन को रोकने के लिए क्या करें ? मन को रोकने के लिए निरंतर सत्संग, प्रभु की लीलाओं का श्रवण, नाम जप आदि से मन में विषयों के प्रति वैराग्य उत्पन्न होगा | जितना वैराग्य बढता जाएगा इन्द्रियाँ बाहर की तरफ दौड़ने की बजाये अंतर की तरफ उन्मुख होने लगेंगी | भोगी से योगी की यात्रा शुरू हो जायेगी | राधे राधे

3772 days 1 hrs 18 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

भोगी कौन ? जिसकी इन्द्रियाँ बाह्य विषयों की और दौड़ती है वो भोगी है और जिसकी इन्द्रियाँ अंतर में दौड़ती हैं वो योगी है | संयम से मन को वश में करते हुए इन्द्रियों को बाह्य विषयों की तरफ जाने से रोका जा सकता

3772 days 13 hrs 35 mins ago By Pradeep Pal
 

Gita me prabhu kahte h ki, abhayas se indriyo par niyantran kr sakte hai,... Par aisa b h grahshta jiwan me rahkar b kai yogi hai.... Is liye ati sarwagya warjatate.... Hare krishn

3772 days 14 hrs 20 mins ago By Nidhi Nema
 

राधे राधे,मन ही समस्त कार्यो का कारण है,मन को वश में करना चाहिये,मन को वश में करने के लिए अभ्यास करना जरूरी है,जैसे पानी का घड़ा धीरे धीरे भरता है वैसे ही अभ्यास से मन धीरे धीरे वश में आता है,इसलिए मन कि हर गतिविधि पर नजर रखना चाहिये.

3772 days 17 hrs 5 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... इन्द्रियों को वश में करने का प्रयत्न न करें, मन को वश में करने का प्रयत्न करें।.... मन के वश में हो जाने पर सभी इन्द्रियाँ स्वतः ही वश में हो जाती हैं।.... संसार में सभी जीवात्मायॆं भोगी ही हैं, भोगी से योगी बनने के लिये ही मनुष्य शरीर प्राप्त होता है।.... जिस व्यक्ति का मन उसके वश में हो जाता है वही जीवात्मा भोगी से योगी बन पाती है।

 
Tags :
Radha Blessings



Click here to know more about Radha Blessings
Popular Article
Popular Opinion
Latest Bhav



Today Opinion Topic

हम अधिक अनुशासित कैसे बने?

Radhakripa on Mobile

Guru/Gyani/Artist
DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
Copyright © radhakripa.in>, 2010. All Rights Reserved
You are free to use any content from here.