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पांडवों के साथ हमेशा भगवान् श्री कृष्ण रहे पर फिर भी उन्हें हिमालय में गलना पड़ा ! इसका कारण ?


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3758 days 2 hrs 12 mins ago By Bhakti Rathore
 

niskaam bhakti se gopiya niskaam bhkat thi pandbo ke purva janm ke kerme the so

3772 days 21 hrs 5 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... भगवान की प्राप्ति हो जाने पर जीवात्मा कर्म बंधन से तो मुक्त हो जाती है लेकिन प्रारब्ध भोगने के पश्चात ही जीवात्मा पूर्ण रूप से मुक्त हो पाती है।.... पांडवों ने भी अपने प्रारब्ध को ही भोगा था।

3772 days 21 hrs 34 mins ago By Diwakar Kushwaha
 

pandavo ke saath bhagwan krishna rahe lakin yudhisthir ko chod kar baaki sabhi ne jeevan bhar kisi na kisi paristhiti me jhooth aur anya prakar ke dharm se hate huwe rashto ko apnaya jiske karan unhe himalay yatra me galna pada,yudhishthir ne keval ek baar satya ko thoda ghuma phirakar he kaha tha jiske karan unki ek ungli he gali aur unhe sasharir swarg gaman ka adhikaar prapta huwa "Jara sochiye Hum Sabhi ka Kya Hoga Agar Hum Yuhe Anginat Paap karte Rahe"

3772 days 23 hrs 31 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

भगवान् सदा साथ रहे पर पांडवों को स्वर्गारोहण के समय युद्धिषठर को छोड़ बाकी पांडव बंधुओं को द्रौपदी समेत हिमालय में गलना पड़ा | ऐसे ही उद्धव जी को भी गोलोक गमन के समय प्रभु ने आज्ञा दी की जाओ बद्री नाथ जाकर तप करो | यानी भगवान् के इतना सामीप्य पाने के बाद भी मोक्ष की कोई और प्रक्रिया है जिसको करे बगैर मोक्ष संभव नहीं है | और ये प्रक्रिया है तप यानी अंतर की यात्रा, बिना अंतर की यात्रा किये हमें अपने षड विकारों से मुक्ति नहीं मिल सकती और बिना षड विकारों के मुक्त हुए हमारी स्वयं की मुक्ति संभव नहीं है | ऐसी अंतर की यात्रा प्रेम वश गोपिओं को सहज ही प्राप्त थी वो बाहर थी हीं नहीं अंतर्मुखी थीं | ऐसे ही शत्रु पक्ष जैसे कंस भय के कारण अंतर्मुखी हो गए उनको अंतर में भय से ही कृष्ण ही कृष्ण नज़र आते थे | मुक्ति का सम्बन्ध बाहरी क्रिया कलापों से नहीं है ये हमारे अन्दर ही छिपा है और बिना गुरु के उस स्वरुप का पहचानना मुश्किल है | ज्यों ही साधक उस स्वरुप का गुरु कृपा से पकड़ पाता है उसके मुक्ति के द्वार खुल जाते हैं | राधे राधे

3773 days 2 hrs 35 mins ago By Gulshan Piplani
 

कर्मों का फल भोगना पड़ता है भगवान् दुखों से छुटकारा तो दिलाते हैं पर कर्मफल से नहीं

3773 days 3 hrs 9 mins ago By Ashish Anand
 

hare krishna! bhagwan shri krishna jab-tak pandavon ke sath the, tab-tal unka kuch bi bura nahin hua... rahi baat himalay jane ki to iss sharir ko tyagane ke liye hume bhog to bhogana hi padega... aur pandav koi sadharan bhakt nahin the, ve to bhagwan ke sath leela karne aaye the... they to ve devata hi... radhe-radhe...

3773 days 16 hrs 47 mins ago By Gulshan Piplani
 

पूर्व जन्मों के कर्मफलों के कारणवश|

 
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