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Pandit Ji

आध्यात्मिक पथ पर मेरी प्रगति हो रही है, यह मैं कैसे समझ पाऊंगा ?


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3773 days 12 hrs 47 mins ago By Gulshan Piplani
 

जब हम प्रभु को समर्पित हो जाते हैं तो कुछ समझने कि आवश्यकता ही नहीं पड़ती सब कुछ स्वम होता चला जाता है और फिर भी अगर समझना चाहते हैं तो सोचें कि आपकी पूजा या ध्यान में बैठते वक्त अगर आपके और भगवन के बीच में कोई है अर्थात कोई विचार है तो अभी तप की आवश्यकता है|

3779 days 1 hrs 45 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... कर्म तीन प्रकार से किये जाते हैं। १. स्वार्थ की भावना से, २. परमार्थ की भावना से, ३. निस्वार्थ भावना से।...... स्वार्थ और परमार्थ की भावना से किये जाने वाले कर्म भौतिकता की ओर प्रेरित करते हैं और निस्वार्थ भावना से किये जाने वाले कर्म आध्यात्मिकता के लिये प्रेरित करते हैं।

3782 days 23 hrs ago By Bhakti Rathore
 

jai shree radhe radhe adhtmic path per pragti ho rahi he iske samghne ke ley jub aap apne eastki malapuja dhyan kerte he us waqtyahi aapkeaur aapke eastke dersan hotehe aur kisi ke nahi to aap apni manjil per punch gyehe bus yahi se aap samgh jaayge kiaap sahi pragti per he jai shree radhe radhe

3782 days 23 hrs 36 mins ago By Gulshan Piplani
 

जब हम प्रभु को समर्पित हो जाते हैं तो कुछ समझने कि आवश्यकता ही नहीं पड़ती सब कुछ स्वम होता चला जाता है और फिर भी अगर समझना चाहते हैं तो सोचें कि आपकी पूजा या ध्यान में बैठते वक्त अगर आपके और भगवन के बीच में कोई है अर्थात कोई विचार है तो अभी तप की आवश्यकता है|

3783 days 3 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

अध्यात्मिक पथ पर हम प्रगति को जानने का वैसे तो कोई पैरामीटर नहीं है | बस हम अपने विकारों और विचारों पर नज़र रख सकते हैं कि विकार दूर हो रहे हैं और विचार शुद्धता कि तरफ बढ़ रहे हैं पर ये भी एक धोका हो सकता है क्योंकि अगर हम जंगल में हैं वहाँ भोग नहीं सता रहे पर हो सकता है जैसे ही हम भोगों के बीच पहुंचे हम उनकी तरफ आकृष्ट हो जाएँ | कितना भी सावधान रहें चूक होने कि संभावना रहती ही है | क्योंकि भोगों के बीच जाकर हम अगर निर्विकार रह भी गए तो भी हो सकता है एक अहम् हमारे अन्दर भर जाए कि हमने इन्द्रियों को जीत लिया जैसे नारद जी को हुआ था | और वो भोगों से भी खतरनाक है | बस इतना ही समझे कि उसकी कृपा से साधन चल रहा है और वो हमारी बाहं पकडे रहे और हमें इस जाल से बचाए रखे | निरंतर सत्संग करते रहें, सत्संग से विकार दूर रहते हैं कभी ना माने कि हमने कुछ प्रगति की है जाने कि अभी तो शुरुवात है बहुत आगे जाना है | राधे राधे

 
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