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Pandit Ji

जब हम पूजा करते समय भगवान की मूर्ती को सजाते हैं तो वह बहुत सुंदर प्रतीत होती है, और जब हम ध्यान करने के लिए आँखे बंद करते हैं तो वह भी बहुत सुन्दर लगता है | फिर हमने क्या करना चाहिए, हमें देखना चाहिए या ध्यान करना चाहिये ?


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3602 days 9 hrs 56 mins ago By Saurabh Srivastava
 

hame apna pura dhyaan sirf ishwar ki puja karne me lagana chahiye na ki use dekhne me kyonki agar hum murti ki taraf dekhenge to hamara dhyaan bhi bhatkega aur hamari puja bhi puri nahi ho payegi

3610 days 10 hrs 34 mins ago By Bhakti Rathore
 

jai shree radhe radhe dekhna jub takcheiye jub tak humhri ankhe aur humra man trpht na ho jaaye use baad dhyan kere. radhe radhe

3610 days 11 hrs 4 mins ago By Gulshan Piplani
 

हमें सोचना होगा की हम ध्यान में बेठे हैं या मूर्ति को देखने के लिए, अगर ध्यान में मूरत आ रही है वह खूबसूरत लग रही है या नहीं लग रही है तो अभी मन कहीं अटका हुआ है वह उसमें ख़ूबसूरती देखने की चाहत अटकन भटकन है जब यह सब शम हो जायेगा तो ध्यान लगने लगेगा| सीधे से कहैं तो जब हम ध्यान में बेठे हैं तो ध्यान में कुछ भी आना माया की बिम्ब है| क्योंकि अगर मूर्ति देखनी है तो खुली आँखों से भी हम देख ही सकते हैं|

3611 days 11 hrs 27 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

हमें भगवान् की मूर्ती को तब तक निहारते रहना चाहिए जब तक ह्रदय में वो स्वरुप प्रकट ना हो जाए और जब एक बार ह्रदय में प्रकट हो जाए तो फिर उस स्वरुप के ह्रदय में ही दर्शन करने चाहिए | क्योंकि बाहर के दर्शन तो साधन है साध्य तो ह्रदय के दर्शन ही हैं | राधे राधे

 
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