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क्या जप के लिए माला अनिवार्य है ?

क्या माला मात्र जप गिनने के लिए है या इसकी कोई और भी उपयोगिता है ?

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3763 days 13 hrs 1 mins ago By Neeru Arora
 

shuru shuru main jaroorat hoti hai bad main nahin

3763 days 21 hrs ago By Waste Sam
 

radhey radhey..jaap mala aniwarya nahi hai aur naa yeh kewal ginane ke hoti hai.. bus yeh ek sadhan hai sadhana mein... hum ungaliyon par bhi jaap kar sakte hai... mann mein bhi kar sakte hai... jai shri radhey

3763 days 21 hrs ago By Waste Sam
 

radhey radhey..jaap mala aniwarya nahi hai aur naa yeh kewal ginane ke hoti hai.. bus yeh ek sadhan hai sadhana mein... hum ungaliyon par bhi jaap kar sakte hai... mann mein bhi kar sakte hai... jai shri radhey

3782 days 22 hrs 39 mins ago By Gulshan Piplani
 

जब मनुष्य जाप प्राम्भ करता है तो प्राम्भिक अवस्था में उसे माला आवश्यक होती है जैसे पूजा में मूर्ती|

3783 days 16 hrs 39 mins ago By Prahlad Sharma
 

esliye pooja ke bad mansik jap kiya jata hai ?

3783 days 17 hrs 12 mins ago By Prahlad Sharma
 

जप के लिए माला की जरुरत नहीं होती ?मन की माला ही बहुत है ?क्योंकि मन से अगर आप कोई कम करोगे ? वही फलित होगा अनेथा नहीं ??

3786 days 17 hrs 24 mins ago By Bhakti Rathore
 

jai shree radhe radhe ha jaap ke ley mala jauri he per ginne ke ley nahi. Ha iski aur upyogita ye he ki jub hum apne guru mantra ka jaap mala se kerte he to ye nahi malum hota he ki hum jaap ker rahe he. Mala ek madhyam he hume apne east ki parpti ke ley.wo hume apne east se schatkaar kerwba deti he jaap kerte kerte hum ye bhul jaate he ki hum kaha he aur kya he bus apne east se milan me kho jaate he bus us time jo anubuti hoti he wo mala kekerne se he ho sakti he mala ke samay humra dhyan kahi nahi bhatkta he. bus humra aur humhre east ka milanhota he malajaap ke dwabra.jai shree radhe radhe

3786 days 20 hrs 38 mins ago By Radha Charan Das
 

प्रारंभिक अवस्था में जप गिनती के साथ ही शुरू किया जाता है इसलिए माला की आवश्यकता होती है वैसे तो किसी और चीज से भी गिन सकते हैं पर माला हाथ में रहने से ध्यान भटकता कम है इसलिए गुरुदेव अपने शिष्य को माला हाथ में लेकर ही जप करने के लिए कहते हैं पर जैसे जैसे जप ह्रदय में रमता रहता है हर सांस के साथ जप होता रहता है तब गिनने की आवश्यकता नहीं रहती और माला की आवश्यकता भी ख़तम हो जाती है | लेकिन माला की अपनी उपयोगिताएं भी हैं जैसे मध्यमा ऊँगली और अंगूठे से माला जपने से मस्तिक्ष की तरंगे क्रियान्वित होती है | इसलिए जप में माला फेरना उपयोगी माना गया है | जो लोग सिद्धि करना चाहते हैं उनके लिए अलग अलग माला का प्रावधान है तुलसी की माला वैष्णव जन फिरते हैं इस माला से मन में वैराग्य की भावना बनती है | रुद्राक्ष की माला शंकर जी के भक्त फिरते हैं और वैसे भी रुद्राक्ष उछ रक्त चाप को शांत करता है | लाल चन्दन की माला देवी जी के उपासक फिरते हैं लाल चन्दन की माला से जप करने से भोगों की प्राप्ति होती है | इसी तरह स्फटिक की माला भी सिधिओं में काम आती है तांत्रिक लोग इसका ज्यादा उपयोग करते हैं | माला अपने अन्दर भक्ति को जगाने का साधन मात्र ही है जो सिद्धि करना चाहते हैं उनके लिए माला की उपयोगिता है | साधक के लिए तो माला से ज्यादा इष्ट का अक्स ह्रदय में उतरना महत्वपूर्ण है | राधे राधे

3786 days 22 hrs 12 mins ago By Haripriya Dasi
 

राधे राधे,साधना के लिए साधन तो है ही माला. साथ ही अलग-अलग माला का अलग उपयोग होता है.जैसे तुलसी कि माला- पद्म पुराण में कहा गया है कि तुलसी कि माला गले में धारण करके भोजन करने से अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है,गले में धारण करके स्नान करने से समस्त तीर्थो के स्नान का फल मिलता है,मृत्यु के समय यदि तुलसी कि माला गले में हो तो यम दर्शन नहीं होते.इस प्रकार रुद्राक्ष कि माला गले में धारण करने पर उच्च रक्तचाप नहीं होता,तुलसी कि माला से भगवान विष्णु श्री कृष्ण, कि उपासना,रुद्राक्ष से शिव जी की उपासना, कमल घट्टे की माला से लक्ष्मी जी और दुर्गा जी उपासना करने का उत्तम विधान कहा गया है,जो जिस की सिद्दी कराने वाला इष्ट हो माला भी वैसी ही सिद्ध हो जाती है .

3787 days 4 hrs 10 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... बिना साधन के साधना प्रारम्भ ही नहीं हो सकती है। माला द्वारा जप करना तो साधना की प्रारम्भिक अवस्था मात्र है।

 
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