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humare saath jo kuch bhi ho raha hai uske liye kya humara mastishq aur soch hi zimewar hai??


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3782 days 23 hrs 18 mins ago By Gulshan Piplani
 

प्रशन बहुत गहन है उत्तर में किताब लिखी जा सकती है परन्तु सोचने वाली बात यह है की जिम्मेवारी ली किसने हमारे अहंकार ने, बुद्धि ने, मन ने, आत्मा ने या हृदय ने जो जिम्मेवारी ले रहा है वोही तो जिम्मेवार होगा|

3799 days 22 hrs 28 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

ये जिज्ञासा हर किसी में है की हम जो कर रहे हैं या जो भोग रहे हैं वो अपनी बुद्धि से या किसी के वश में हैं | कभी ऐसा लगता है की सब कुछ यंत्र आरूढ़ हो रहा है कभी ऐसा लगता है की हम अगर सोच समझ कर करे तो और अच्छा कर सकते हैं किसी बुरे से बच सकते हैं | सभी कहते हैं की कर्म तीन प्रकार के हैं प्रारब्ध, क्रियामान, और संचित | कहते हैं प्रारब्ध भोगना ही पड़ता है और क्रियामान वो है जो हम कर रहे हैं उसका फल अभी भी भोगना पढ़ सकता है और वो संचित भी हो सकते हैं | लेकिन प्रशन फिर ये उठता है कि कैसे पता चले कि ये भोग है प्रारब्ध का या इस समय का नया कर्म है | मेरा मानना है कि हमारे पास कोई साधन नहीं है इसे जानने का कि ये प्रारब्ध था या नया कर्म था कयोंकि जहाँ हम असफल हो जाते हैं उसे नियति मान लेते हैं और जहाँ सफल हो जाते हैं उसे अपना कर्म | हमने अपनी सारी असफलताएं प्रभु के नाम लिख दी हैं और सफलताएं अपने नाम लिख लेते हैं कभी कभी कह देते हैं कि ठाकुरजी कि कृपा से सफल हो गए पर साथ ही ये कहना भी नहीं भूलते कि बढ़ी मेहनत करनी पढ़ी | इसलिए एक विचार अपने मस्तिक्ष में पक्का रखना चाहिए कि जो हो रहा है उसे समर्पण भाव से स्वीकार करते चलें प्रभु कि लीला का दृष्टा बनकर आनंद लिए जाए सुख दुःख दोनों धूप छाँव कि तरह हैं आते रहेंगे | तुलसी दास जी के वचन बिलकुल सत्य हैं : सुनो भारत भावी प्रबल बिलखी कहें मुनिनाथ हानि लाभ जीवन मरण यश अपयश सब विधि हाथ || इन छे बातों में संसार का हर कर्म आ जाता है | इसलिए मन में द्वन्द न ला कर हर कर्म को उसे समरपति करते हुए उसके फल को आनंद से भोगते चलें यही जीवन है यही शरणागति है |...........राधे राधे

3801 days 22 hrs 16 mins ago By Ashish Anand
 

nahin! yahaan do baten important hai.... 'pehala ki humare sath abhi jo kuch bhi ho raha hai, jo kuch bhi hum bhugat rahen hain, uske liye humare sanchit karma (past mein kiye gaye karma ke fal ke karan) zimmedar hain... aur dusara abhi present mein humara mind jo kuch bhi soch raha hai aur uske fal swaroop jo kuch bhi kar raha hai... uska parinam... kuch to turant bhugtana padta hai aur kuch karmo ke fal future mein apko bhugatane ke liye sanchit kar diye jaten hai... hare krishna!

3806 days 11 hrs 21 mins ago By Avijit Das
 

RADHEY RADHEY.....HUMARE SATH JO BHI HO RAHA HAY WOH SAB APNA KARM KA PHAL KA HISAB SE ..MASTISHQ SE ATA HAY SOCH ..SOCH SE HOTA HAY KARM...KARM SE MILTA HAY PHAL....PHIR BHI JO HUA ACHA HI HUA...JO HO RAHA HAY ACHA HI HO RAHA HAY OR JO HOGA WOH BHI ACHA HI HOGA..SO DONT WORRY..BAS BOLO RADHEY RADHEY ..RADHEY RADHEY OR RADHEY RADHEY.

3809 days 22 hrs 21 mins ago By Nidhi Nema
 

राधे राधे, व्यक्ति अपने कर्मो का स्वयं उत्तरदायी होता है,कर्म तीन प्रकार के होते है प्रारब्ध कर्म संचित कर्म और क्रियमाण कर्म,हम जो भी पिछले जन्म के करके आये है, उसी का परिणाम हम आज है, और हम जो आज कर रहे है, वही हमारा भविष्य है. तीनो काल व्यक्ति स्वयं बनाता है और दोष कभी भगवान को देता है तो कभी भाग्य को , पर भाग्य भी तो व्यक्ति अपने कर्मो से बनाता है और भगवान तो साक्षी मात्र है....

 
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