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ज्ञान ,भक्ति और कर्म मार्ग क्या एक दुसरे से नितांत पृथक मार्ग हैं ?

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3883 days 3 hrs 46 mins ago By Manish Nema
 

“हिन्दू दर्शन में दो ह़ी मार्ग इश्वर की प्राप्ति हेतु बताये गए है ! जिसमे से एक है भक्ति मार्ग दूसरा ज्ञान मार्ग ! दोनों का अंतिम लक्ष्य आत्मा का परमात्मा से मिलन है” ! भक्ति का तात्पर्य है जो सीधे भगवद् प्राप्ति करा दे, यह तभी संभव है जब साधक या भक्त अपने उपास्य का स्वरूप, स्वभाव और प्रभाव को जान लेता है। भक्ति भगवत्‌ को प्राप्त होने से पूर्व प्रारंभ होती है और भगवत्‌ प्राप्ति के बाद भी सतत्‌ चलती रहती है। भक्ति वह स्थिति है जो साधक को एकरस कर भव बंधन से मुक्त कर देती है। भक्ति और ज्ञान साधन नहीं है, अपितु एक-दूसरे के पूरक हैं। इसमें एक को भी पकड़ लेने से भगवान की प्राप्ति हो जाती है। सूत्र है कि ज्ञान से भक्ति की प्राप्ति होती है और भक्ति से साधक परम ज्ञानी हो जाता है। वस्तुतः भक्ति मानव के कल्याण का सूत्र है जिसे पकड़ लेने से सीधे भगवद् प्राप्ति ही होती है।

3883 days 17 hrs 20 mins ago By Murli Dhar
 

no they little bit inter related...in this world nothinh is 100% pure ..except krishna 's love ....Kailash ji aap ek kam karenge....Vevikanad ke 4 books hai bhakti ghyan karma and yog par ...jarur padiyega sb doubts door ho jayenge..hare krishna

3884 days 23 hrs 22 mins ago By Murli Dhar
 

what is the quickest way to attain/reach to lord krishna?

3885 days 2 hrs 46 mins ago By Manish Nema
 

राधे राधे,जैसे छोटी-छोटी नदियाँ अलग-अलग मार्ग से महासागर की ओर जाती है, कोई पर्वतो से होकर जाती है, कोई मैदानों से गुजरती है, कोई वनों से होकर जाती है, सभी के मार्ग अलग-अलग है पर लक्ष्य सभी का एक है. महासागर, इसी प्रकार ज्ञान, भक्ति, कर्म मार्ग,अलग अलग होते हुए भी स्वरूपतः एक ही है,ओर सभी का लक्ष्य एक ही है उस परम परमात्मा तक पहुँचना.उन नदियों की तरह तीनो में अंतर है. ज्ञान - ज्ञान के बिना भक्ति अधूरी है और कर्म भी ज्ञान के बिना अधूरा है,इसी प्रकार,भक्ति- भक्ति के बिना ज्ञान अधूरा है और कर्म भी,और ज्ञान मार्ग हो या भक्तिमार्ग, कर्म तो हर पल होता ही है कर्म किये बिना तो व्यक्ति रह ही नहीं सकता."राधे-राधे"

 
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