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इच्छाओ का समर्पण !

कौनसी इच्छाओ को भगवान के समक्ष समर्पित कर देना चाहिए और कौनसी इच्छाओं को स्वयं के प्रयासों के द्वारा पूरा किया जा सकता है ? इसे कैसे समझें ?

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3483 days 12 hrs 15 mins ago By Sharu Rani
 

good

3484 days 15 hrs 34 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... इच्छा और कामना का भेद जाने बिना इच्छाओं का समर्पण असंभव है।...... जो इच्छायें वर्तमान जीवन में पूर्ण होती हैं, केवल वही इच्छायें होती हैं और जो इच्छायें वर्तमान जीवन में पूर्ण नहीं होती हैं, वह कामनायें होती हैं।...... इच्छायें प्रारब्धवश प्रकृति के द्वारा स्वतः पूर्ण की जाती हैं, और कामनायें वर्तमान जीवन में कभी पूर्ण नहीं होती हैं।........ इसलिये व्यक्ति को अपनी सभी कामनायें भगवान को समर्पित कर देनी चाहिये।....... वर्तमान जीवन में स्वयं के प्रयासों से न तो इच्छायें ही कभी पूर्ण होती हैं और न ही कभी कामनायें पूर्ण हो सकती हैं।_________ यदि यह भेद समझ में न आये तो चिन्ता नहीं करनी चाहिये, तब इसे सार रूप से समझने का प्रयास करना चाहिये।........... सार यह है कि जो इच्छायें पूर्ण हो जायें उसे भगवान का प्रसाद समझना चाहिये, और जो इच्छाये पूर्ण न हों उन्हे भगवान को समर्पित कर देनी चाहिये।

 
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