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क्या अध्यात्म को विज्ञान के द्वारा समझाया जा सकता है?


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3617 days 22 hrs 47 mins ago By Reena Jhamb
 

mere vichar se adhatham ka rasta shardhya aur bhav se shuru hota hai...baki sabka apna apna nazariya..

3667 days 18 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... समझाने की शक्ति ईश्वर ने किसी को नहीं दी है, समझने की शक्ति ईश्वर ने सभी को दी है।........ अध्यात्मिक हो या भौतिक हो, समझाया तो किसी को नहीं जा सकता है, केवल विज्ञान के द्वारा समझा ही जा सकता है।...... किसी भी प्रकार का ज्ञान जब तक विज्ञान में परिवर्तित नहीं हो जाता है तब तक उस ज्ञान का कोई महत्व नहीं होता है।........ चाहे वह भौतिक ज्ञान हो या आध्यात्मिक ज्ञान हो।..... जिस प्रकार भौतिक सैद्धांतिक ज्ञान (Physical Theoratical knowledge) को भौतिक विज्ञान (Physical Practical knowledge) में परिवर्तित करके संसार के अंश मात्र को समझा जाता है, उसी प्रकार आध्यात्मिक सैद्धांतिक ज्ञान (Spiritual Theoratical knowledge) को आध्यात्मिक विज्ञान (Spiritual Practical knowledge) में परिवर्तित करके अंश रूप से ही समझा जा सकता है।........... यदि कोई शिष्य समझ जाता है तो सामने वाला व्यक्ति (गुरु) उसे अपने द्वारा समझाया हुआ मान लेता है तो यह तो सामने वाले व्यक्ति (गुरु) की अज्ञानता का ही परिचायक होता है।

3667 days 19 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... समझाने की शक्ति ईश्वर ने किसी को नहीं दी है, समझने की शक्ति ईश्वर ने सभी को दी है।........ अध्यात्मिक हो या भौतिक हो, समझाया तो किसी को नहीं जा सकता है, केवल विज्ञान के द्वारा समझा ही जा सकता है।...... किसी भी प्रकार का ज्ञान जब तक विज्ञान में परिवर्तित नहीं हो जाता है तब तक उस ज्ञान का कोई महत्व नहीं होता है।........ चाहे वह भौतिक ज्ञान हो या आध्यात्मिक ज्ञान हो।..... जिस प्रकार भौतिक सैद्धांतिक ज्ञान (Physical Theoratical knowledge) को भौतिक विज्ञान (Physical Practical knowledge) में परिवर्तित करके संसार के अंश मात्र को समझा जाता है, उसी प्रकार आध्यात्मिक सैद्धांतिक ज्ञान (Spiritual Theoratical knowledge) को आध्यात्मिक विज्ञान (Spiritual Practical knowledge) में परिवर्तित करके अंश रूप से ही समझा जा सकता है।........... यदि कोई शिष्य समझ जाता है तो सामने वाला व्यक्ति (गुरु) उसे अपने द्वारा समझाया हुआ मान लेता है तो यह तो सामने वाले व्यक्ति (गुरु) की अज्ञानता का ही परिचायक होता है।

 
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