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मन आखिर है क्या?

ये मन आखिर है क्या? क्या यह हमारे दिमाग में किसी एक जगह में है या यह पूरे जगत में व्याप्त है?

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3533 days 14 hrs 59 mins ago By Vandana Goel
 

the mind is a part of subtle body, which is also composed of intelligence and ego. mind resides near the heart of living entity.From mind arises all type of emotions and desires.

3537 days 17 hrs 28 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... मन, बुद्धि और अहंकार प्राकृतिक दिव्य तत्व हैं जिससे प्रत्येक व्यक्ति के वास्तविक स्वरूप का निर्माण होता है.... मन का वास स्थान हृदय और बुद्दि का वास स्थान दिमाग (मस्तिष्क) होता है।..... मन में ही भाव की उत्पत्ति होती है, कर्तापन का भाव ही अहंकार होता है, इसलिये अहंकार का वास स्थान मन होता है।.... यह सभी तत्व जगत में सभी प्राणीयों में एक समान रूप में विद्यमान रहते हैं।

3538 days 10 hrs 46 mins ago By Jaswinder Jassi
 

मनं क्या है और ये सरीर में कहाँ निवास करता है...?
तन्न + मनं = जीव
(body + mind = LIVING BODY)....EGG + sprem
पंज तत्व तन्न =स्थूल सरीर
एक तत्व मनं =सुख्शम सरीर ....
पर्किर्ती सभी जीवों की रचना करती है ]
सभी जीवों में male -female होते हैं , जिन के मिलन से जीवों का जन्म होता है कोई भी जीव इन दोनों के मिल्न के बिना नही जन्म लेता , इन के मिलन में क्या होया है ? इन के मिलन में अंडज और सुक्राणु का मिलम होता है , अंडज female body में होता है और सुक्राणु male body से आता है दोनों का मिलन ही एक जीव को जन्म देता है ] पशु पक्षी और मानुष सभी इस्सी पर्कार से जन्म लेते हैं....एकला तन्न जीव नही होता और न ही एकला मनं जीव होता है...
जीवों का स्थूल सरीर सैलों का बनना होता है और हर सैल पे दो electric chrage होते हैं जिनकी आपस में एक दुसरे के प्रति कशिश होती है जिस की वजह से ये आपस में जुर्ते जाते हैं और एक सरीर ( body ) का रूप ले लेते हैं , इन सैलों के दोनों terminals ( -ve aur +ve) जब तक आपस में नही जुरते तब तक सरीर में current की धरा नही चलती ये बिजली के धारा का बहना ही जीव का जीवन है ....सुक्राणु इन दोनों terminals को जोर्ता है और जीव में जीवन धारा बहने लुगती है और जीव का जीवन आरभ होता है ...
ये मनं सुक्राणु मनं ही है जो किस्सी सरीर को जीवन देता है....
ये मनं इक तत्व होने के कारण कब्बी नही मरता भाव कभी नही बिखरता ....ब्हु तत्व स्थूल सरीर बिखर जाता है..
. जैसे बिजली का करंट ही बिजली के ज्न्त्रों को चलता है इस्सी तरा ये मनं ही सरीरों को गतिशील रखता है...ये जीव के दिमाग में निवास करता है और जहाँ से ही पुरे सरीर को चलाता है...
**जस्सी**
[email protected]

3538 days 11 hrs 1 mins ago By Jaswinder Jassi
 

मनं क्या है और ये सरीर में कहाँ निवास करता है...?
तन्न + मनं = जीव
(body + mind = LIVING BODY)....EGG + sprem
पंज तत्व तन्न =स्थूल सरीर
एक तत्व मनं =सुख्शम सरीर ....
पर्किर्ती सभी जीवों की रचना करती है ]
सभी जीवों में male -female होते हैं , जिन के मिलन से जीवों का जन्म होता है कोई भी जीव इन दोनों के मिल्न के बिना नही जन्म लेता , इन के मिलन में क्या होया है ? इन के मिलन में अंडज और सुक्राणु का मिलम होता है , अंडज female body में होता है और सुक्राणु male body से आता है दोनों का मिलन ही एक जीव को जन्म देता है ] पशु पक्षी और मानुष सभी इस्सी पर्कार से जन्म लेते हैं....एकला तन्न जीव नही होता और न ही एकला मनं जीव होता है...
जीवों का स्थूल सरीर सैलों का बनना होता है और हर सैल पे दो electric chrage होते हैं जिनकी आपस में एक दुसरे के प्रति कशिश होती है जिस की वजह से ये आपस में जुर्ते जाते हैं और एक सरीर ( body ) का रूप ले लेते हैं , इन सैलों के दोनों terminals ( -ve aur +ve) जब तक आपस में नही जुरते तब तक सरीर में current की धरा नही चलती ये बिजली के धारा का बहना ही जीव का जीवन है ....सुक्राणु इन दोनों terminals को जोर्ता है और जीव में जीवन धारा बहने लुगती है और जीव का जीवन आरभ होता है ...
ये मनं सुक्राणु मनं ही है जो किस्सी सरीर को जीवन देता है....
ये मनं इक तत्व होने के कारण कब्बी नही मरता भाव कभी नही बिखरता ....ब्हु तत्व स्थूल सरीर बिखर जाता है..
. जैसे बिजली का करंट ही बिजली के ज्न्त्रों को चलता है इस्सी तरा ये मनं ही सरीरों को गतिशील रखता है...ये जीव के दिमाग में निवास करता है और जहाँ से ही पुरे सरीर को चलाता है...
**जस्सी**
[email protected]

 
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