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श्राद्ध का अधिकारी कौन है ?

मृत्यु के बाद परिवार में श्राद्ध करने का अधिकारी कौन-कौन होता है ?

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3720 days 14 hrs 50 mins ago By Dasi Radhika
 

मरणोपरांत संस्कारों को पूरा करने के लिए पुत्र का प्रमुख स्थान माना गया है। शास्त्रों में लिखा है कि नरक से मुक्ति पुत्र द्वारा ही मिलती है। इसलिए पुत्र को ही श्राद्ध, पिंडदान का अधिकारी माना गया है और नरक से रक्षा करने वाले पुत्र की कामना हर मनुष्य करता है। इसलिए यहां जानते हैं कि शास्त्रों के अनुसार पुत्र न होने पर कौन-कौन श्राद्ध का अधिकारी हो सकता है - - पिता का श्राद्ध पुत्र को ही करना चाहिए। - पुत्र के न होने पर पत्नी श्राद्ध कर सकती है। - पत्नी न होने पर सगा भाई और उसके भी अभाव में संपिंडों को श्राद्ध करना चाहिए। - एक से अधिक पुत्र होने पर सबसे बड़ा पुत्र श्राद्ध करता है। - पुत्री का पति एवं पुत्री का पुत्र भी श्राद्ध के अधिकारी हैं। - पुत्र के न होने पर पौत्र या प्रपौत्र भी श्राद्ध कर सकते हैं। - पुत्र, पौत्र या प्रपौत्र के न होने पर विधवा स्त्री श्राद्ध कर सकती है। - पत्नी का श्राद्ध तभी कर सकता है, जब कोई पुत्र न हो। - पुत्र, पौत्र या पुत्री का पुत्र न होने पर भतीजा भी श्राद्ध कर सकता है। - गोद में लिया पुत्र भी श्राद्ध का अधिकारी है। - कोई न होने पर राजा को उसके धन से श्राद्ध करने का विधान है। - पुरुष के ना होने पर महिलाये भी श्राद्ध कर सकती है .

 
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