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संतुलन कैसे लाऊँ?

कभी मुझे अच्छा लगता है और कभी बुरा दोनों में संतुलन कैसे लाऊँ?

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3550 days 8 hrs 11 mins ago By Gulshan Piplani
 

जब तक हम बंधन ग्रस्त रहते हैं हम सम्पन्नता का भाव नहीं समझ पाते| इसके लिए सम्पन्नता को समझना बहुत जरूरी है| असम्पन्न व्यक्ति उसे कहते हैं जिसके पास कितना भी हो जाये पर वह आभावग्रस्त हो| करोड़ों, अरबों, खरबों, पर फिर भी अभाव| इसके विपरीत सम्पन्न उसे कहा जाता है जिसके पास जो कुछ भी हो वह उसमें संतुष्ट रहे| इसका सम्बन्ध मात्र धन से ही नहीं जीवन के हर पहलू से है| जैसे घर वालों से प्रेम मिलता है पर और चाहिए| घर में बना बनाया खाना मिलता है पर फिर भी अच्छा बुरा लगता है| बच्चे हमारे जतन से और अपने भाग्य से अच्छी जॉब कर रहे हैं पर फिर भी संतोष नहीं| ऐसे हजारों कारण असम्म्पनता के विद्धमान रहते हैं जीवन में| बस जीवन में संतोष का प्रादुर्भाव हो जाये और सम्पन्नता का भाव जागृत होने लगे तो संतुष्टता आने लगेगी और जीवन संतुलित होने लगेगा| प्रयास बिना नहीं कुछ मिलता - जीवन इसी वजह से हिलता|| - हरि ॐ तत्सत -

3552 days 11 hrs 50 mins ago By Vipin Sharma
 

jab tak bura nahi hota to achha bhi nahi ho sakta. jivan me dono jaruri h. Sukh or dukh hi jivan ka santulan hota h aise hi achha or bura balance hi h.

3555 days 8 hrs 29 mins ago By Diwakar Kushwaha
 

जब सभी इश्वर के बनाये हुए है तो उनमे भेद कैसा और अगर उनमे भेद करेंगे तो इश्वर को कैसे प्राप्त कर सकेंगे बस इस बात पर सोचते रहिये सभी अछे लगने लगेंगे , भगवान् के बच्चे लगने लगेंगे-----हरी ॐ तत्सत

3555 days 16 hrs 23 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... बुरा लगने का कारण मूल कारण अच्छा लगना होता है।.... यदि जीवन को संतुलित करना है तो संसार में किसी भी वस्तु को अच्छा नहीं समझना होगा।.... जब हम किसी भी वस्तु को अच्छा नहीं समझेंगे तो हमें कोई भी वस्तु बुरी भी नहीं लगेगी।

 
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