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How spirituality helps to balance the life ?


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3557 days 5 hrs 31 mins ago By Gulshan Piplani
 

हम आध्यात्म की लगन को कैसे जागृत करें?इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है? (प्रशन राधाक्रिपा.कॉम से उद्धृत) पहले तो यह समझना आवश्यक है कि अध्यातम क्या है| १. क्या अध्यातम धर्म है? नहीं अध्यातम धरम नहीं है धर्म मात्र एक दिशा है| धर्म अलग अलग हो सकते हैं| २. अध्यातम क्या एक विचार है? नहीं विचार भी भिन्न भिन्न होते हैं ३.अध्यात्म क्या सत्य का ज्ञान है? तो हर व्यक्ति की अपनी प्रकृति और ज्ञान के अनुसार सत्य की परिभाषा अलग अलग हो सकती है| लोगों का देवताओं को लेकर ही मत-भेद देखने को मिलता है| वेद व्यास जी की वेदांत दर्शन ब्रह्म सूत्र में पृष्ठ - ७४ में शाकल्य ने ३३ बताया है अन्य लोग ३३ करोड़ बताते हैं , कितना बड़ा मतभेद है ३३ से ३३,००,००,००० तक का मतभेद| हर कोई ज्ञान प्राप्त करने के लिए जिस सत्संग से जुड़ा होता है उसकी आसक्ति अपने गुरु और सत्संग से हो जाती है और अपने गुरु द्वारा प्रेषित विचार ही उसके लिए सत्य होते हैं| हम विचारें तो यहाँ भी मतभेद हो सकते हैं| और होना कोई बुरी बात भी नहीं| तो फिर अध्यात्म क्या है?

3557 days 8 hrs 40 mins ago By Gulshan Piplani
 

सम्पूर्ण विश्व की नज़रे आजकल अध्यात्म में रचे बसे भारत की ओर हैं| तो क्या अध्यात्म अपने से भिन्न अर्थात किसी अन्य की कृति से प्रेम का नाम है| पर + कृति = प्रकृति से प्रेम का नाम है अध्यात्म| इसको यूं भी समझ सकते हैं कि मात्र स्वयं से प्रेम न करने का नाम अध्यात्म है| या दूसरे शब्दों में कहें तो सम्पूर्ण जीवों से प्रेम करना ही अध्यात्म की परिभाषा है| जब हम हर मनुष्य से ही नहीं हर जीव से प्रेम करने लगते हैं| उस अदृश्य सत्ता कि बनायीं हुई हर वस्तु (कृति) से प्रेम करने लगते हैं तो हम अध्यात्मिक कहलाने के हकदार हो जाते हैं| तो इसका तात्पर्य तो यही हुआ कि उस अदृश्य सत्ता को स्वीकारना ही अध्यातम है|

3557 days 8 hrs 40 mins ago By Gulshan Piplani
 

सम्पूर्ण विश्व की नज़रे आजकल अध्यात्म में रचे बसे भारत की ओर हैं| तो क्या अध्यात्म अपने से भिन्न अर्थात किसी अन्य की कृति से प्रेम का नाम है| पर + कृति = प्रकृति से प्रेम का नाम है अध्यात्म| इसको यूं भी समझ सकते हैं कि मात्र स्वयं से प्रेम न करने का नाम अध्यात्म है| या दूसरे शब्दों में कहें तो सम्पूर्ण जीवों से प्रेम करना ही अध्यात्म की परिभाषा है| जब हम हर मनुष्य से ही नहीं हर जीव से प्रेम करने लगते हैं| उस अदृश्य सत्ता कि बनायीं हुई हर वस्तु (कृति) से प्रेम करने लगते हैं तो हम अध्यात्मिक कहलाने के हकदार हो जाते हैं| तो इसका तात्पर्य तो यही हुआ कि उस अदृश्य सत्ता को स्वीकारना ही अध्यातम है|

3557 days 8 hrs 41 mins ago By Gulshan Piplani
 

उस अदृश्य सत्ता ने हमें जल, पृथ्वी , वायु, आकाश, अग्नि बिना किसी शर्त के प्रदान की भिन्न भिन्न विचारों के लोगों को भी उस अदृश्य सत्ता ने बिना किसी शर्त के अपनी कृति प्रदान कर दी अपना प्रेम बिना किसी शर्त के प्रदान कर दिया| तो जब हम उस अदृश्य सत्ता से प्रेम करने लगते हैं तो हम अध्यात्मिक कहलाते हैं| और ऐसा होते ही अध्यातम में स्वत: संतुलन आने लगता है - हरि ॐ तत्सत् -

3557 days 15 hrs 41 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... (आध्यात्म ज्ञान = सत्कर्म का ज्ञान)..... सत्कर्म के ज्ञान बिना जीवन का संतुलन असंभव है।.... सत्कर्म का ज्ञान प्रत्येक व्यक्ति को अपनी अवस्था (वर्ण और वर्णाश्रम) के अनुसार ही ग्रहण करना होता है।.... जो व्यक्ति अपनी अवस्था के अनुरूप निरन्तर सत्कर्म करता है तो उस व्यक्ति का जीवन सन्तुलित होने लगता है।.... पूर्ण रूप से तो सत्कर्म का ज्ञान ब्रह्म-साक्षात्कार के बाद ही प्रकट होता है।..... जब सत्कर्म का ज्ञान स्वयं में प्रकट हो जाता है तभी आध्यात्मिक यात्रा प्रारम्भ होती है।..... इससे पहले तो सभी भौतिक यात्रा ही करते रहते हैं।.....यही आध्यात्मिक ज्ञान का सार है।..... सत्कर्म का ज्ञान "श्रीमद भगवत गीता" में वर्णित है।

3558 days 6 hrs 9 mins ago By Diwakar Kushwaha
 

इश्वर में जब आस्था होगी तभी तो समर्पण भाव आएगा जल्दी नहीं तो देर में ही सही लेकिन आएगा जरूर और जब उनमे कर्मो का समर्पण करते हुए अपने सांसारिक पुरुषार्थो को पूरा करेंगे तो जीवन अपने आप संतुलित हो जायेगा ---हरी ॐ तत्सत

 
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