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इर्ष्या

इर्ष्या, मत्सर और असुइया में क्या अंतर है?

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3745 days 23 hrs 1 mins ago By Pt Chandra Sagar
 

किसी दूसरे को अपने से अधिक ऐश्वर्य प्राप्त करते हुए देखकर जो मन के द्वेष अथवा जलन होता है उसे इर्षा कहते हैं , जबकि दूसरों के सद्गुणों में भी अकारण दुर्गुणों का दर्शन करना मात्सर्य कहलाता है | और सबमे भेदभाव का दर्शन करना असुइया भाव कहलाता है ,सबमे ब्रह्मात्मक दृष्टि के कारण ही माता अनसुइया कहलायीं | ये तीनों परिभाषा शास्त्र सम्मत है ,अब कोई अपनी मर्जी से चाहे कुछ भी कहे | जय श्री राधे

 
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