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इर्ष्या

इर्ष्या, मत्सर और असुइया में क्या अंतर है?

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3576 days 11 hrs 51 mins ago By Pt Chandra Sagar
 

किसी दूसरे को अपने से अधिक ऐश्वर्य प्राप्त करते हुए देखकर जो मन के द्वेष अथवा जलन होता है उसे इर्षा कहते हैं , जबकि दूसरों के सद्गुणों में भी अकारण दुर्गुणों का दर्शन करना मात्सर्य कहलाता है | और सबमे भेदभाव का दर्शन करना असुइया भाव कहलाता है ,सबमे ब्रह्मात्मक दृष्टि के कारण ही माता अनसुइया कहलायीं | ये तीनों परिभाषा शास्त्र सम्मत है ,अब कोई अपनी मर्जी से चाहे कुछ भी कहे | जय श्री राधे

 
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