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चेतना की दृष्टा अवस्था क्या होती है? कोई व्यक्ति इस अवस्था पर कब पहुँचता है?


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3729 days 20 hrs 36 mins ago By Gulshan Piplani
 

जब मनुष्य यह जान लेता है कि वह मात्र निमित है कारन नहीं इसे चेतना कि दृष्टा अवस्था कहा जाता है अर्थात आत्म को जब परमात्म का ज्ञान हो जाता है और वह अपने कर्मों को दायित्व समझ कर करता है और फल प्रभु पर छोड़ देता है और फलों को दृष्टा भाव से मात्र देखता है - अशुभ का प्रतिकार न होए, दुःख में भी सुख पाये| कठिन तितिक्षा अंदर बेठे ब्रह्म से तुझे मिलाये| बाकि तो बस राधे राधे करता जा| दृष्टा बन कर तरता जा| - राधे राधे

3746 days 16 hrs 34 mins ago By Neeru Arora
 

जीव जब शरीर से स्वं को अलग मानने लगता है तब उसकी चेतना दृष्टा भाव में परिवर्तित हो जाती है| गुलशन पिपलानी जी की एक कविता से उद्धृत एक दोहा उनकी आत्म - साक्षात्कार कविता से प्रस्तुत कर रही हूँ..................... अशुभ का प्रतिकार न होए, दुःख में भी सुख पाये| कठिन तितिक्षा अंदर बेठे ब्रह्म से तुझे मिलाये|| अर्थात जब शुभ और अशुभ का प्रतिकार होना बंद हो जाता है और उस वक़्त जो भाव उजागर होता है उसे ही दृष्टा अवस्था कहते हैं| - जय श्री कृष्णा

3746 days 17 hrs 38 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... चेतना = जीवात्मा अपनी भाव-दृष्टि से जब स्वयं को अपने स्थूल शरीर से अलग देखने लगती है तब जीवात्मा दृष्टा भाव में स्थित हो जाती है, और स्वयं को अकर्ता और प्रकृति को ही कर्ता रूप से देखती है, इसे ही दृष्टा अवस्था कहते हैं।.... यह अवस्था भगवान की कृपा से प्राप्त होती है।.... भगवान की कृपा व्यक्ति को कर्म के द्वारा पात्रता हासिल होने पर प्राप्त होती है।.... पात्रता "सकाम-भाव" के त्याग के साथ "निष्काम भाव" से कर्म होने पर प्राप्त होती है।

3747 days 21 mins ago By Bhakti Rathore
 

jub jaap kerte kertehumhre east ke alaba aur kuch na dekhe de na aur kuch sune de aur dur mantra kerte kerte is tak puncha jaa sakta he

3747 days 7 hrs 40 mins ago By Diwakar Kushwaha
 

JAB SABHI VICHARO SE UPAR UTHKAR MAATRA EK PRABHU KA HE VICHAAR VICHAR KARNEY YOGYA LAGE BAAKI SABHI SANSARIK BANDHANO SE CHITTA HAT JAYE VAHI CHETNA KI DRASHT AVASTHA HAI JISE "KUNDALI JAGRAN" BHI KEHTE HAI.

 
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