Theme :
Home
Granth
eBook
Saint
Yatra
Shanka
Health
Pandit Ji

हमारा नजरिया..

वेदों को लो या शास्रो को हर किसी में कुछ तो अलग मिलेगा... और जब हम किसी महापुरुस को सुनते है तो उनका भी नजरिया अलग होता है .. तो क्या हम इन सब से हटकर किसी विषय में हम अपना नजरिया रखा सकते है ..

  Views :1805  Rating :0.0  Voted :0  Clarifications :7
3741 days 15 hrs 39 mins ago By Dasabhas DrGiriraj N
 

nazariya jaisa vyaktitv vaisaa, sabhi nazariye theek to hain, lekin sabhee ka parinaam alag alag hain.

3743 days 16 hrs 15 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

इस संसार में हर जीव की प्रकृति अलग अलग है हरेक का सोचने का भाव भी अलग अलग है | इसी अलग अलग प्रकृति की वजह से ही आज इतने मार्ग प्रभु प्राप्ति के खुल चुके हैं | जो रास्ता जीव को अपनी प्रकृति के अनुसार अच्छा लगता है वो उस पर चल पड़ता है और अपने लक्ष्य की ओर आसानी से अग्रसर हो जाता है | अगर वो अपनी प्रकृति के विपरीत मार्ग पर चलेगा तो हो सकता है उसे बीच में ही छोड़ दे | एक अकेली श्रीमदभगवत गीता की ही इतनी व्याख्याएं हैं की अगर हम सबको देखेंगे तो कुछ ना कुछ विरोध जरूर मिलेगा वो सिर्फ प्रकृति और भाव की वजह से अब श्री कृष्ण ने अर्जुन को तो गीता एक ही भाव से सुनायी होगी और अर्जुन ने एक ही भाव से सुनी होगी पर हम सब उसकी व्याख्या बिल्कुल अपने ढंग से कर रहे हैं | ऐसे ही प्रभु प्राप्ति के साधन को भी अलग अलग प्रकृति के जीवों ने अलग अलग बताया है जैसे राधास्वामी शास्त्रों से लिए पांच नामों को सुमिरन कर अंतर में ध्यान की प्रक्रिया को महत्व देते हैं | महाप्रभु जी नाम संकीर्तन को महत्व दिया है | ब्रिज में ही देखें तो कितने सम्पर्दायें है और सब की पद्दिती एक दूसरे से भिन्न है और सब ही सही हैं क्योंकि सबने पाया है | इसलिए अपनी प्रकृति के अनुसार अपने गुरुदेव से जो मार्ग मिले उस पर दृढ़ता से चलना चाहिए | हमें किसी भी पद्दिती की निंदा नहीं करनी है सिर्फ अपने मार्ग पर चलना है | यही मेरा नजरिया है | राधे राधे

3743 days 19 hrs 45 mins ago By Bhakti Rathore
 

wradhe radhe apne apne man ke bhaav he ye to jo jase kah paaye

3745 days 21 hrs 40 mins ago By Gulshan Piplani
 

प्रभु ने हर मनुष्य को अलग अलग प्रकृति प्रदान ही इस लिए की है ताकि अलग अलग नज़रिए मनुष्य के समकक्ष प्रस्तुत रहें| इसी से उन्नति का मार्ग प्रशस्त हुआ और होता है और होता रहेगा| हर कोई अपनी प्रकृति के अनुसार ज्ञान को प्राप्त करता है और जब उसमें उसकी प्रकृति का समावेश होता है तो एक नया नजरिया उपजता है| जिसको रखने मैं वह स्वतंत्र होता है - राधे राधे

3746 days 14 hrs 29 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... स्वभाव की स्वतंत्रता भगवान ने सभी मनुष्यों को दी है।.... जैसा व्यक्ति का स्वभाव होता है वैसा ही दृष्टिकोण होता है।

3746 days 15 hrs 5 mins ago By Waste Sam
 

radhey radhey... ved, puran, sant sab apne bhav ke anusaar kisse bhi cheez ke vyakhaya karte hai... jab hume banana bhagwan bhi wahi bhav ko dharan karta hai jis bhav se hum (bhakt) usse yaad kare toh ismein bhi galat ke hum apne najariye se cheezo ko dekhe.. parantu humari vichaar dhara sakarathmak honi chahiye..jai shri radhey

3747 days 4 hrs 18 mins ago By Diwakar Kushwaha
 

VEDO AUR SHASTRO SE HE GYAN KA UDGAM HAI VEDO KO PADHNE KA ADIKAAR SABHI KO NAHI APITU VARG VISHESH KO HE HAI ISKA KARAN KI UNHE TAP KI AGNI SE TAPAKAR US YOGYA BANAYA JATA THA KI VE HE ISKO SAHI ROOP ME GRAHAN KAR SAKTE THE LAKIN AAJ SUB KUCH ULAT PULAT HO GAYA HAI ISLIYE ANADHIKRIT LOGO KE HATAKSHAPE SE ARTH KE ANARTH NIKAL RAHE HAIN JO BHRAM KA MOOL KARAN HAI. ISSE BACHNE KE LIYE AASTHA KA DEEPAK JALAYE YE BHRAM KE BADAL HAT JAYENGE AUR JO SATYA HAI SHUDDHA HAI WAHI SAAMNE HOGA. SHIV SIDDHAM

 
Tags :
Radha Blessings



Click here to know more about Radha Blessings
Popular Article
Popular Opinion
Latest Bhav



Today Opinion Topic

हम अधिक अनुशासित कैसे बने?

Radhakripa on Mobile

Guru/Gyani/Artist
DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
Copyright © radhakripa.in>, 2010. All Rights Reserved
You are free to use any content from here.