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Shadi se pehle main satsung par bahut jati thi... but ab nhi ja pati... kya Kishori ji mujhse naraz hain jo mujhe khud se itna door kar diya..??? kyunki ghar par bhi sara din unka naam nhi le pati.. dhyan kahi or chala jata hai.

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3577 days 10 hrs 11 mins ago By Nidhi Nema
 

राधे राधे,आपको पता है भक्त और भगवान के बीच सबसे महत्वपूर्ण क्या है ?"विश्वास"मेरे ठाकुर जी मेरे लिए जो भी करेगे उस पर पूर्ण विश्वास,जो ठाकुरजी के हो जाते है उन्हें फिर फ़िक्र करने कि जरुरत नहीं होती,वे स्वयं ही अपने भक्त को मोह माया से निकलकर अपनी भक्ति में लगा लेते है,भक्त के जीवन में किसी को माध्यम बनाकर भेज देते है.शायद आपके जीवन में भी कभी कोई संत,भक्त या अन्य कोई माध्यम आपको मिल जाये.मै ऐसा यू ही नही कह रही हूँ,मेरे अपने जीवन का अनुभव है.शायद राधा कृपा साईट ही माध्यम बन जाये,आपको पता है आपके जैसी मेरी भी हालत थी मै भी यदि सोचती थी,कही शादी के बाद मै भी घर गृहस्थी में फस कर न रह जाऊ,पर जिसे हम मोह माया कहते है असल में वही भक्त कि परीक्षा है कि वह कैसे उस माया से घिर कर भी भगवान को याद करता है. वही बात "मांगने वाले खाली हाथ न गए कितनी मिली सौगात न पूंछो, उनकी कृपा तो उनकी कृपा है उनकी कृपा कि बात न पूंछो" मुझे राधा कृपा जैसा माध्यम मिला.उनकी प्रत्यक्ष कृपा देखाई देती है.

3580 days 15 hrs 21 mins ago By Nancy Dahra
 

Nidhi Ji thnx so much.... mujhe apka diya hua answer bahut pasand aaya... bt plz don't mind man mein ek or shanka hai.... ki main abhi Thakurji ki bhakti mein paripakav nhi hoon..... to aisa na ho ki duniyadari nibhate-2 main apne Thakurji ko bhool jaun.... kyunki mere sath aisa hi ho rha hai main moh mein fasti ja rhi hoon... so plz plz mujhe bataiye main kya karu... main bahut hi duvidha mein hoon kitne time se..... or apki site dekh kar mujhe bahut khushi hui ki shayad ab meri duvidha door hogi.....

3582 days 12 hrs 11 mins ago By Nidhi Nema
 

राधे राधे,आप के प्रश्न पर मुझे प्रहलाद जी का चरित्र याद आ रहा है प्रहलाद जी को भगवान पाँच वर्ष की छोटी उम्र में मिल गए थे.इसके बाद जब वे बड़े हुए तो उन्होंने राज्य लेने और विवाह करने से मना कर दिया था.कि मेरा मन अब में प्रभु से हटाकर संसार में नहीं लगा सकता,तब उन्हें स्वयं ब्रह्मा जी ने समझाया.कि यदि तुम राज्य नहीं लोगे और विवाह नहीं करोगे तो फिर तुम सही अर्थो में भगवान कि प्रसन्नता नहीं चाहते.जब ब्रह्मा जी ने समझाया तब प्रह्लाद जी ने विवाह भी किया और राज्य भी लिया,क्योकि संन्यासी बनकर भगवान कि साधना करना सरल है परन्तु गृहस्थ में रहकर सभी कुछ सँभालते हुए,भजन करना बहुत कठिन है,जो गृहस्थ और आध्यात्म दोनों में सामजस्य बिठाता है,वही वास्तव में भक्त है,कर्तव्यों का निर्वाह किये बिना कोरी भक्ति करता है,उससे भगवान कभी प्रसन्न नहीं होते.

3582 days 14 hrs 35 mins ago By Nancy Dahra
 

thnx.. mujhe mere ek question ka ans. mil gya... bt ye samajh mein nhi aa rha ke mujhse aisi kya galti hui jo usne mujhe iss moh maya mein fsa diya? main aisa bilkul nhi chahti thi, shadi se pehle bhi or ab bhi unse bus unki bhagti hi mangi.... bt Thakurji ne duniya ki to sab khushiyan de di bt unki bhagti mein main peechhe hoti ja rhi hu... aisa kyu? jabki maine ye duniya ke cheeze to unse kabhi mangi hi nhi thi....

3583 days 17 hrs 35 mins ago By Diwakar Kushwaha
 

SHADI SE PEHLE AUR SHDI KE BAAD KE JEEVAN ME BADA HE ANTAR HOTA HAI,SHADI KE PEHLE AAP APNEY MATA PITA KE SAATH THEE. WAHA AAP KO BACHPAN SE DHARMIK AUR AASTIK SANSKAAR MILE JISSE AAP NE UNHI KE ANUROOP APNA JEEVAN JIYA LAKIN JAB AAP KI SHADI HUI TO LIFE THODA SA BADAL GAI SABHI NAYE CHEHRE AUR VICHRO WALE NAYE MATA PITA AUR PATI SE AAP KA PARICHAY HUA,LIFE THODI COMPLICATED LAG RAHI HAI,YAHI JEEVAN HAI,LAKIN ADJUSTMENT KARNA HE MANUSHYA HONE KI NISHNI HAI,BUS EK BAAT DHYAN RAKHIYE KI HUM SABHI KE VAASTAV ME MATA PIT ISHWAR HAI KYA KOI BHI ITNA HAMARA ITNA SAGA HO SAKTA HAI JISKE KARAN HUM UN PARAMPIT PARMESHWAR KO BHOOL JAYE.

3584 days 12 hrs 48 mins ago By Gulshan Piplani
 

Shadi se pehle main satsung par bahut jati thi... but ab nhi ja pati... kya Kishori ji mujhse naraz hain jo mujhe khud se itna door kar diya..??? kyunki ghar par bhi sara din unka naam nhi le pati.. dhyan kahi or chala jata hai. मनुष्य में सदा तीन गुण विद्धमान रहते हैं ऐसा गीता जी में लिखा है| वह तीन गुण हैं सतोगुण, रजोगुण, तमोगुण,| देश काल और संग से इनकी प्रधानता बदलती रहती है| प्रभु कभी भी किसी से भी नाराज़ नहीं होते| जो सबको मात्र आनंद देता हो और बदले में कुछ भी न चाहता हो वोह किसी से कैसे नाराज़ रह सकता है| नाराज़ तो मनुष्य भी किसी से तब ही होता है जब जो वोह दूसरे से अपेक्षा रखता है और उसकी अपेक्षा पूर्ण नहीं होती अन्यथा जब मनुष्य ही जिससे अपेक्षा नहीं रखता उससे नाराज़ नहीं होता तो प्रभु हमसे क्या कोई अपेक्षा (लालच) रखते हैं| ऐसा विचार करना परमावश्यक है| new para... शादी से पहले लोग चार मुख्य कारणवश सत्संग में जाते हैं १) परीक्षा में पास हो जायें या बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर पायें| २)अच्छी सी नोकरी मिल जाये या व्यापार अच्छा चल निकले ३)प्रभु से आगे जीवन साथी अच्छा मिले उसकी प्रार्थना करने हेतु 4) प्रभु से प्रेम हो गया होता है| पहले तीन कारण में हमारा स्वार्थ जुड़ा होता है ज्यों ही हमारा स्वार्थ सध जाता है तो हमारी शक्ति वहां से सम्बन्ध विच्छेद कर लेती है| और जहाँ लालच होता है वहां प्रवाहित होने लगती है| इसमें किसी का कोई दोष नहीं होता| क्योंकि लोभ भी प्रभु प्रदान ही है| प्रभु चाहते तो मनुष्य में लोभ के भाव का संचार ही न करते, जो की प्रभु के लिए संभव था| परन्तु उन्होंने सृष्टि को चलायमान रखने हेतु ही ऐसा किया| new para... परन्तु साथ साथ यह ज्ञान भी दिया कि तुम मेरे अंश हो मुझमें समाहित हो कर मुक्ति प्राप्त मनुष्य जीवन में ही कर सकते हो| पहले लोग भगवान को पूरा दिन याद रखने के लिए अपने बच्चों के नाम राधा, कृष्ण, राम, गोपाल इत्यादि इसलिए ही रखा करते थे| शादी के बाद रजोगुण में रहना अच्छी बात है परन्तु उसे भूल जाना जिसने हमें हर क्षण जीवन का आनंद देना है विचारणीय है| परन्तु अपने ऐसा प्रशन किया जिससे प्रभु के प्रति आपका प्रेम स्पष्टत: झलकता है| घर के समस्त कार्य करते करते ही जिसको भी आप मानते हो उसे याद करें| अगर दो पल भी आराम करने का सौभाग्य प्राप्त होए तो आराम के साथ साथ कह सकते हैं आ राम आ राम करता हूँ आ नन्द आ नन्द आता है| संग राम में भी राम छिपा पर नन्द छोड़ चला जाता है| - बाकि तो बस राधे राधे करता जा - आगे आगे बढता जा|

 
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