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Pandit Ji

सभी सांसारिक सुख और परिवार के होते हुए भी अगर कोई भीतर ख़ालीपन महसूस करे तो क्या करें?


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3581 days 4 hrs 7 mins ago By Waste Sam
 

radhey radhey... jab hume lage ke ander adhoorapan hai toh sanjh lena chahiye ke hum khud (antaraatma) se he dor hai aur khud se jodna hee bhakti ka karya hai... jai shri radhey

3588 days 12 hrs 7 mins ago By Bhakti Rathore
 

radhe rani ki shran me chale jaaye wo sub suna pan bher deti he usse acha koi rasta nahi he aur unki bhakti me lag jaaye satsanf sune santo ka saath kere

3590 days 10 hrs 47 mins ago By Gulshan Piplani
 

राधे राधे - ईश्वरीय शक्तियों से सम्पूर्ण मनुष्य वह सब कार्य करने में सक्ष्म होता है जो प्रभु चिंतन कर सकते हैं अर्थात उस अंशी ने अपने अंश को सम्पूर्णता प्रदान की है | जब अंश स्वम को पूर्णत: नहीं समझ पाता उसी स्थिति में उसे खालीपन का अहसास होना उसे प्रभु का सन्देश देना मात्र है| क्योंकि जब तक वह अपने को मात्र अपने परिवार तक ही सीमित रखता है तब तक उसे उनमें ही सुख की प्राप्ति होती है परन्तु प्रभु की कृपा उन लोगों पर मात्र इसलिए नहीं होती की वह अपने को दो-चार प्राणियों तक ही अपनी शक्ति को सीमित रखे अर्थात जब मनुष्य अपना प्यार मात्र अपने बच्चों और परिवार तक सीमित रखता है तो मात्र परिवार तक सीमित रह जाता है अगर वह समाज तक सीमित रखता है तो समाज तक सीमित रह जाता है और जब देश तक सीमित रखता है तो देश तक सीमित रह जाता है और जब समस्त विश्व के मनुष्यों के लिए सीमित रखता है तो विश्व के मनुष्यों तक सीमित रह जाता है और जब वह प्रभु निर्मित हर जीव के लिए अपना प्यार रखता है तो ब्रह्म हो जाता है| पसंद सर्वथा उसकी ही रहती है| खालीपन का अनुभव होना यह दर्शाता है की प्रभु कृपा होने लगी है अपनी शक्ति को मात्र येष्टी से हटा समष्टि के लिए कुछ करना प्रारंभ अगर हम करें तो सतत सुख अर्थात आनंद की अनुभूति होने लगेगी और खालीपन अर्थात शून्यता का भाव समाप्त हो जायगा क्योंकि प्रभु का एक उसके साथ जुड़ जायेगा| - राधे राधे

3590 days 11 hrs 33 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

जब तक मन कहीं लगेगा नहीं तब तक खाली पन रहेगा चाहे कितने ही आपके पास सासारिक सुख हों चाहे कितना बड़ा परिवार हो चाहे कितना ही आप अध्यात्मिक या धार्मिक क्रिया कलाप करते हों | मन की तृप्ति ही खाली पन को दूर करती है | जो मिला है उसमे संतोष आ जाए तो मन तृप्त होता है और की चाह में मन में भटकाव बढ़ते हैं | यही भटकाव मन में निराशा लाते हैं और निराशा होने से ही खाली पन महसूस किया जाता है | कहते हैं जो तृप्त है वो जंगल में बैठकर भी मस्त है और जो अतृप्त है वो भरे शहर में भी अकेला है | खाली पन को दूर करने के लिए अपने को व्यस्त रखें अपना एक रूटीन निश्चित करें एक समय सारणी बनाएं उस पर चलें शुरू में कठिन लगेगा लेकिन धीरे धीरे आदत पड़ जाती है एक बार मन लगने लगेगा उस रूटीन में तो खाली पन बिल्कुल ख़तम हो जाएगा | इस सन्दर्भ में एक गाने की लाइन है वो कुछ मुझे ऐसी ही प्रेरणा देती हैं | " आप इसी तरह रोज अगर मिलते रहे देखिये एक दिन प्यार हो जाएगा |" कहने का तात्पर्य ये है की नित्य क्रिया से मन उसमे लगने लगता है | राधे राधे

3590 days 15 hrs 25 mins ago By Vipin Sharma
 

prabhu bhajan me man lagane ki koshish kare fir apka har ek jagah man lagne lagega or khalipan ka to matlab hi nahi.

 
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