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moksh ki prapti

moksh ki prapti mrityu ke antim kshan main ho jati hai ya vah dhram raj ke paas pahunchney ke pashchat hoti hai, aur agar kisi karan vash us vyakti ke ghar ka koi bhi vyakti vahan uplabhdh na ho to kya use moks nahin milta?

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3588 days 11 hrs 12 mins ago By Bhakti Rathore
 

unki puja aur bhakti se is jeevan me mokha ki parpti ho sakti he uske bina nahi

3589 days 8 hrs 38 mins ago By Gulshan Piplani
 

यहाँ प्रशन कुछ अलग ढंग से पूछा गया है| मेरे विचार से प्रशन है की अगर किसी व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त होना हो और मृत्यु के समय उसका कोई भी पुत्र या घर वाला व्यक्ति वहां उपलब्ध न हो तो क्या उसे मोक्ष मिलेगा या नहीं? दरअसल यहाँ मृत्यु के बाद वाले किये जाने वाले क्रिया-कलापों और पंडितों द्वारा करवाए जाने वाले दान इत्यादि पर प्रशनचिंह लगाया गया है| कि जैसे गरुड़ पुराण एवं अन्य पुराणों में संकेत मिलते हैं| यह पूछा गया है कि उनके बिना मोक्ष होगा या नहीं? मन के संकल्प एवं विकल्प समाप्त हो जाने पर मोक्ष मिलता ही है चाहे बाद के क्रिया कलाप पूर्ण हों या नहीं? क्योंकि धरम एक दिशा है अध्यातम तो जीवन है| पंडित एवं ब्रह्मण इत्यादि दिशा का भाग हैं और अध्यातम हर धरम में एक ही ही| ऐसा मेरा मानना है| - राधे राधे

3590 days 10 hrs 19 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

मोक्ष वो स्थिति है जब जीव का सूक्षम शरीर मृत प्रायः हो जाता है यानी मन बिल्कुल स्थिर ना उसमे संकल्प बनते हैं ना विकल्प ना दुःख होता है ना सुख वो सर्वदा एक स्थिति में रहता है ऐसे मन को मृत कहते हैं सूक्षम शरीर के तीन में से एक तत्व अहंकार ख़तम हो जाता है सूक्षम शरीर का आधार ही ख़तम हो गया तो पुनर्जन्म कहाँ से होगा वो पूर्ण स्थिति है वो मोक्ष है वो तो इसी जीवन काल में होती है मृत्यु तो फिर नाम है केवल | ऐसे जीव को पहुँच धरम राज नहीं होते वो तो पहले ही उस परम सत्ता में विलीन हो चुके होते हैं | और जब धर्म राज में पास जाना ही नहीं तो किसी के मिलने या मिलने का प्रश्न ही ख़तम हो जाता है | मोक्ष जीव के अकेले की स्थिति है उसका और किसी से सम्बन्ध नहीं है | राधे राधे

3590 days 14 hrs 34 mins ago By Vipin Sharma
 

Diwakar ki answer hi mera answer hai

3590 days 16 hrs 16 mins ago By Diwakar Kushwaha
 

Pehli baat to Aap ki jaankari ke liye Bata Du ki Moksha Aur Swarg gaman ye Dono Alag Alag Hai.Jo Ache kam karte hai Wo Apney Ache Karmo ke Karan Dharmaraj ke Adeshanusar Swarg Bhej Diye Jaate hain jab Tak Ki unke Ache Karm Samapt na Ho jaye We Log Swarg ka Bhog Karte hain,Uske baad We Wapas isi Sansar me punah shresth yoni me janma lete hain. "MOKSHA" wah stithi hai jab prani ka man ishwar ko poornta samarpit ho jata hai aur use ache ya bure karmo ka koi mahatva nahi reh jata wo vastav me ishwar me samahit ho jata hai,uska janma,maran,sukh,dukh sabhi kriyaon aur vicharo se koi sambandh nahi reh jata,atah moksha he sarvasrestha gati hai.Moksha ke uprant na koi saga sambandhi hota hai,na koi shatru na mitra,hota hai to keval parmatma se milan.

 
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