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निंदा का ईर्ष्या से क्या रिश्ता है?

ईर्ष्या की क्या परिभाषा है और निंदा का ईर्ष्या से क्या रिश्ता है?

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3750 days 18 hrs 16 mins ago By Waste Sam
 

radhey radhey... irsha ke paribhasha hai doosare ke bhale yaa tarakki se khush naa hona balki dukh ka anubhav karna... ninda aur irsha ek doosare ke purak hai kyonki jisse hum irsha karte hai usshe ke ninda karte hai... jai shri radhey

3759 days 21 hrs 35 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

अपने को हीन मानने वाला व्यक्ति ही इर्ष्या करता है | ऐसे व्यक्ति जो खुद कुछ कर तो सकते नहीं पर दूसरो को सफल होते देख उनमे इर्ष्या का भाव पैदा होता है | दूसरे को प्राप्त वस्तु अपने पास ना हो तो ह्रदय में ऐसे जीव के इर्ष्या पैदा होती है | प्रमादी व्यक्तित्व के जीव में इर्ष्या का भाव ज्यादा होता है क्योंकि वो खुद कुछ कर नहीं पाते पर मन तो हर चीज चाहता है जो दूसरे को प्राप्त है | ऐसे ईर्ष्यालु व्यक्ति ही अपने को श्रेष्ठ समझने लगते हैं और दूसरे की निंदा करता है | इर्ष्या का भाव निंदा को जन्म देता है पर कुछ लोग स्वाभिक निंदक ही होते हैं उनको दूसरे में सिर्फ कमी ही नज़र आती है उन्हें सामने वाले में गुण देखने की आदत ही नहीं होती | राधे राधे

3762 days 4 hrs 7 mins ago By Nidhi Nema
 

राधे राधे रवि कान्त जी के उत्तर से हम सहमत है,जब किसी दूसरे की कोई वस्तु जो हमारे पास नहीं है,देखकर मन में ईर्ष्या का भाव उत्पन्न हो जाता है,और यदि हमारे पास है किसी दूसरे के पास नहीं है तो भी हम श्रेष्ठ है ,इस भाव के आते ही मन में ईर्ष्या उत्पन्न हो जाती है,और जब ईर्ष्या आती है तो वाह निंदा के रूप में ही निकलती है.

3762 days 8 hrs 56 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... स्वयं को अन्य से श्रेष्ठ समझने के कारण मन में ईर्ष्या का भाव उत्पन्न होता है।..... ईर्ष्या के कारण ही व्यक्ति अन्य की निन्दा करता है।

3762 days 18 hrs 46 mins ago By Diwakar Kushwaha
 

Doosro ki vridhi aur pratishtha ko dekhkar chote hridaya wale manusyon me jo shatruta ka bhav utpann hota hai use IRSHYA Kehte hai.irshyalu manusya apney se sampanna vyakti ki pratishtha ko kshati pahuchane ke liye shbdik star per uski burai logo me karta hai,yeh he Ninda kehlati hai.

 
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