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त्मा के हृदय रुपी गुहा

इस जीवात्मा के हृदय रुपी गुहा में रहनेवाला परमात्मा छोटे-से-छोटा तथा बड़े-से-बड़ा है| कैसे? अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करैं|

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3588 days 12 hrs 32 mins ago By Bhakti Rathore
 

चेतन तत्व यानी परमात्मा का कोई आकार नहीं होता जैसे कई आकार के घट बनायो तो उस हर घट में आकाश होता है | इसी तरह हर वस्तु जीव में चेतन तत्व विद्यमान है चाहे वो छोटे से छोटा जीव या वस्तु हो | राम चरति मानस में परमात्मा के स्वरुप का वर्णन मिलता है तुलसी दास जी लिखते हैं "पग बिनु चले सुने बिनु काना, कर बिनु कर्म करे विधि नाना |" राधे राधे ye he sahi he radhe radhe

3592 days 14 hrs 50 mins ago By Nidhi Nema
 

राधे राधे,जीवात्मा के ह्रदय रूपी गुहा में परमात्मा बिलकुल वैसे ही है जैसे बहुत सारे घड़े रखे हो जल से भरे और उनमे आकाश का प्रतिबिम्ब दिखायी दे आकाश तो एक ही है,और बहुत विशाल है पर घड़े में उसका प्रतिबम्ब दिखायी देने पर आकाश घड़े के रूप में दिखायी देता है,और अलग अलग घडो में अलग अलग दिखायी देता है,यदि सारे घड़े फूट जाये तो आकाश अपनी अनन्तता में मिल जाता है,ठीकवैसे ही परमात्मा है.

3592 days 19 hrs 23 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।

3593 days 10 hrs 51 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

चेतन तत्व यानी परमात्मा का कोई आकार नहीं होता जैसे कई आकार के घट बनायो तो उस हर घट में आकाश होता है | इसी तरह हर वस्तु जीव में चेतन तत्व विद्यमान है चाहे वो छोटे से छोटा जीव या वस्तु हो | राम चरति मानस में परमात्मा के स्वरुप का वर्णन मिलता है तुलसी दास जी लिखते हैं "पग बिनु चले सुने बिनु काना, कर बिनु कर्म करे विधि नाना |" राधे राधे

3593 days 11 hrs 1 mins ago By Diwakar Kushwaha
 

Jeevatma ishwar ka he pratiroop hai parantu is sansaar me aakar apney vastavik swaroop ko bhool jati hai.jab manushya ko apna vastavik gyan prapt hota hai to ishwar ke saman he uske gud utpann ho jate hain,is stithi me vah chote se lekar bade jeevo me vidyamaan parmatma ke darshan karta hai,na koi uska mitra hota hai aur na koi shatru sabhi kuch us parmatma ka ho jata hai,yahi vah stithi hai jo vairagya kehlati hai.

 
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