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shraap kise kahte hain aj kal bhi kya shrap lagte hain.

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3747 days 14 hrs 45 mins ago By Neeru Arora
 

शर का मतलब होता है बाण शर+आप = श्राप| अर्थात जो बाण आपको परेशान करते हैं उन्हें श्राप कहते हैं| इसको यूं भी समझ सकते हैं की जो शब्दों के बाण हमारे अंत:करन में हमें अपराध बोध कराते हैं उसे ही श्राप कहते हैं| राधे राधे

3751 days 23 hrs 5 mins ago By Gulshan Piplani
 

जब जब अपराध बोध होगा तब तब नकारात्मक उर्जा का प्रवाह होने लगेगा| तत्काल उसका समाधान सम्बद्ध (related) व्यक्ति से क्षमा याचना करके या अगर क्षमा मांग पाना संभव न हो तो अपना मत उसे स्पष्ट करके अपराध बोध से मुक्ति प्राप्त कर लेनी चाहिए| इसमें सम्बंधित व्यक्ति का आपको क्षमा कर देना आवश्यक होता है| यह परमावश्यक है अगर आप आनंदित रहना चाहते हैं| कई बार अपराध बोध में सम्बंधित व्यक्ति से क्षमा याचना कर पाना संभव नहीं होता तो मंदिर में, गिरजा में, या गुरद्वारे में जिसे भी हम मानते हों वहां अपने अराध्ये के सामने जा कर माफ़ी मांग लेनी चाहिए और अपराध बोध को बाहर निकाल देना चाहिए स्वत: नकारात्मकता सकारात्मकता में परिवर्तित हो जाएगी| श्राप आत्मा पर-आत्मा का एक बोझ होता है वह हर काल में विद्धमान रहता है समय या काल उसे समाप्त नहीं कर सकते इस लिए आज कल भी श्राप लगता है| पर हम उसे समझ नहीं पाते| मिथ्यावादियों के और ऐसे लोगों के उपायों से बचना चाहिए जो लोगों को भ्रमित करते हैं| फिर भी अगर कोई अन्य उपायों को मानता हो तो यह उसकी इच्छा और प्रकृति पर निर्भर करता है| जब ज्ञान प्रकाशित हो जाये तो अज्ञान के पीछे क्यों भागना? - बाकि तो राधे राधे करता जा आगे आगे बढ़ता जा|

3752 days 1 hrs 15 mins ago By Gulshan Piplani
 

shraap kise kahte hain aj kal bhi kya shrap lagte hain. राधे राधे --------में जैसा की सर्वविदित है की दुनिया परिवर्तनशील है, बस तत्व का स्वरूप नहीं बदलता पर रूप हर क्षण बदलता रहता है| रूप क्षणिक है स्वरूप चिरस्थायी है| इसी तरह शब्दों का अर्थ समयानुसार बदलता रहता है|आजकल भी श्राप लगता है या नहीं तो इस विषय पर विचार करने से पहले यह जानना परमावश्यक है की श्राप किसे कहते हैं? ....new paragraph...... मनुष्य के शरीर में जब तक उर्जा प्रवाहित रहती है तब तक शरीर चलता रहता है| इस उर्जा अर्थात शक्ति (energy) को विज्ञानिक और ज्ञानीजन दो भागों में विभाजित करते हैं| एक सकारात्मक उर्जा (शक्ति) दूसरी नकारात्मक उर्जा (शक्ति)| जब यह उर्जा नकारात्मकता और सकारात्मकता को पार कर जाती है तो मनुष्य ज्योतिमान हो जाता है और तब यह फैसला वह स्वं करता है कि उसे शरीर के साथ रहना है या उसका त्याग करना है| जिसके बारे में गीता जी में लिखा है कि करोड़ों में कोई एक विरला ही इसकी प्राप्ति कर पाता है|.....न्यू paragraph........ मैं यहाँ गीता के अध्याय-१६ देवासुरसंपदविभागयोग के शलोक - २४ को उद्धृत करता हूँ| दोहा गीताजी का दोहानुवाद मेरी पुस्तक गीताजी-कविताजी से उद्धृत है| हर कर्म को कीजिय, जान शास्त्र विधि विधान| बिन जाने सब अकार्य, कर कार्य शास्त्र प्रमाण|| इसका तात्पर्य है कि मनुष्य को यह अवश्य जान कर कार्य करना चाहिए कि शास्त्रों के विधानानुसार क्या कर्तव्य है और क्या अकर्तव्य| उसे 'मैं' से उपर उठकर विधि के विधानों को जानकर ही कर्म करने चाहिए|.....new paragraph....... सामान्यत: कई बार हमें शास्त्रों का ज्ञान होता है फिर भी हमसे देश, काल और संग और स्थिति में कोई एक के भी विपरीत हो जाने के कारणवश बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है और उस वक़्त हमसे अनर्थ हो जाता है| और ऐसे समय पर अगर कोई हमें विधि विधानों का शास्त्र सम्मत उपदेश ध्यान आ जाता है या अपराध बोध हो जाता है तो मनुष्य स्वं श्रापित हो जाता है| कई बार कोई अन्य व्यक्ति का हम जाने-अनजाने में अनर्थ कर बैठते हैं और उस अनर्थ का हमें अपराध बोध हो जाता है या परिस्थिवश जिसका अनर्थ हुआ होता है वोह हमें कोई अनर्थ शब्द बोल देता है उसे श्राप कहते हैं|........new paragraph.... राजा दशरथ इसका जवलंत उदहारण हैं| उन्हें श्रवण के माता पिता ने कहा था कि जैसे हम अपने पुत्र के वियोग में तड़प तड़प कर मर रहे हैं ऐसे ही तुम भी अपने पुत्र के वियोग में तड़प तड़प कर प्राण त्यागोगे| उस सतयुग में आम जनता भी शास्त्रों के वचनानुसार ही जीवन व्यतीत करती थी तो राजा की तो बात ही क्या| और राजा दशरथ तो बहुत ज्ञानी मनुष्य थे|......new para... देश, काल, संग और परिस्थितियाँ विपरीत होते ही राजा दशरथ को श्रवण के माता पिता द्वारा कहे गए शब्द ध्यान आ गए और वो ही उनकी मौत का कारन बने अर्थात अपराधबोध ही श्राप होता है|

3757 days 23 hrs 59 mins ago By Bhakti Rathore
 

nahi aub kliyug he isme shrap nahi lagta he. ha phele jurur srap lagte he rhe jub rasi muni thpsya kerte the tub koi unhe beech me kahndit ker deta tha tub

3762 days 23 hrs 42 mins ago By Vipin Sharma
 

SHRAAP DENE K LIYE BAHUT TAP KARNA PADTA H. NAHI TO AAJ KI DUNIYA ME KOI KISE SE KHUSH NAHI SAB EK DOOSRE KO SHRAAP DE-DEKAR PARESHAN KARNA CHAHENGE.

3762 days 23 hrs 45 mins ago By Vipin Sharma
 

AAJ KAL KOI ITNA TAP HI NAHI KARTA KI USKA SHRAAM FALIBHOOT HO.

 
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Radha Blessings



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