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आत्मा का दिव्य नेत्र कौन सा होता है?

आत्मा का दिव्य नेत्र कौन सा होता है?

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3588 days 12 hrs 48 mins ago By Bhakti Rathore
 

radhe radhe humra man jub tak man per parda he tub tak hum kuch nahi dekh sakte he in ankho se to hum duniya ki achei aur burei dekh sakte he per man se hum sub dekh sakte he

3593 days 11 hrs 7 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

आत्मा स्वयं चेतन है परमात्मा का अंश है स्वयं दिव्य है सारा संसार वो स्वयं ही है नेत्र देखने के लिए होते हैं स्वयं ही स्वयं को देखने लिए वो नेत्र भी खुद ही है | हाँ जीव अगर उसे जानना चाहता है तो वो अपने मन रूपी नेत्र पर से विषयों की धुल हटा कर उसे जान सकता है | राधे राधे

3593 days 12 hrs 51 mins ago By Gulshan Piplani
 

संकल्पादेव तू तच्छुते:||४.४.८ यह आत्मा अपने मन रुपी दिव्य नेत्रों से ब्रह्मलोक के समस्त भोगों को देखता हुआ रमण करता है| छान्दौप्निषद ८-१२|५,६ से यह बात की पुष्टि होती है कि मात्र मन के द्वारा ही संकल्प से ही उपासक को इस लोक एवम परलोकों के दिव्य भोगों का अनुभव हो सकता है| अर्थात आत्मा का दिव्य नेत्र मन ही होता है|

3593 days 13 hrs 21 mins ago By Nidhi Nema
 

राधे राधे,आत्मा का दिव्य नेत्र है "चेतना",जैसे अग्नि में यदि दहकता या ताप न हो तो वह अपना अस्तित्व खो देगी,उसी प्रकार आत्मा कि दहकता ताप चेतना है.

 
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