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अगर दंड हमें यहीं इसी लोक में प्राप्त होता है तो फिर क्या हमें पुराणों को पुन: लिखना पड़ेगा?

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3599 days 9 hrs 10 mins ago By Gulshan Piplani
 

वेद व्यास जी को भगवान् का अवतार माना जाता है ऋषि वेद व्यास जी महाभारत ग्रन्थ के रचयिता थे| उन्होंने अट्ठारह पुराणों की भी रचना की| उन्होंने वेदों का विभाजन किया और इसी कारण व्यास जी का नाम वेद व्यास पड़ा| तो हम पुराणों को मात्र इतिहास मान कर नहीं छोड़ सकते| एक ऐसा व्यक्ति जो एक लाख शलोकों की रचना करता है और कहीं भी पुन्र्वृति नहीं मिलती| आज इन्टरनेट है कॉपी पेन हैं बुक्स हैं, उस वक़्त ये सब मोहिया नहीं थे | ऐसे व्यक्ति की बातों को मात्र इतिहास नहीं माना जा सकता|आज गुरु पूर्णिमा का त्यौहार जिस व्यक्ति विशेष की वजह से शुरू हुआ उसे मात्र इतिहास नहीं मान सकते हम| यह विचार का विषय है| आज पूरे विश्व में कोई भी एक संत या बड़े से बड़ा अध्यात्मिक गुरु वेद व्यास जी को पढ़े बिना अध्यात्मिक गुरु नहीं बन सकता उसे हम इतिहास मात्र नहीं समझ सकते| इतना बड़ा फिलोस्फेर आज तक नहीं जन्मा| यह चिंतन का विषय है| खोज का विषय है|

3599 days 10 hrs 38 mins ago By Vipin Sharma
 

aap purano ko kya maante ho? Kisne likhe ? Jara vichar karo aaj ki janral baate kal ka itihaas ban jaati h .!!

 
Tags :
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