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बाल लीला - परिचय

  Views : 3105   Rating : 4.5   Voted : 4
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भगवान जब पौगंड अवस्था में (१ वर्ष से लेकर ५ वर्ष)थे. तब तक भगवान ने गृह लीलाये की.जब भगवान ६ दिन के थे तब चतुर्दशी के दिन पूतना आई ,जब भगवान ३ माह के हुए तो करवट उत्सव मनाया जा रहा था तभी शकटासुर आया,भगवान ने सकट भंजन करके उस राक्षस का उद्धार किया.

 

इसी तरह बाल लीलायें ,माखन चोरी लीला,ऊखल बंधन लीला यमलार्जुन का उद्धार आदि दिव्य लीलाये की.भगवान की प्रत्येक लीला दिव्य है और हर लीला का आध्यात्मिक पक्ष है.भगवान की दिव्य लीला तो कोई समझ ही नहीं सकता फिर भी हमारे संतो के ऊपर तो भगवान की विशेष कृपा होती है हमने संतो के मुख से सुना उसे लिखने की हमारी छोटी सी कोशिश है जो भी गलती हो उसके लिए क्षमा प्रार्थी है.   

 

 

"जय जय श्री राधे"


DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
Comments
2011-10-13 00:31:39 By amlesh

bal lila

2011-08-03 22:38:47 By kriti

achchi hai

2011-05-08 20:04:16 By aditya

jai jai golu ke gwale ki

2011-04-28 20:20:54 By deepak

बस जइयो रे मदन गोपाल मेरे मन बस जइयो बस जइयो रे बस जइयो रे---- रसिकबिहारी राधा प्यारी ठाडे गल में बैया डारी और संग में गोपी-ग्वाल मेरे मन बस जइयो

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