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दरिद्रता दुर्भाग्य का नाश करता है - पीपल का वृक्ष

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पुराणों में पीपल के वृक्ष के महत्व का विस्तार से वर्णन किया गया है. आध्यात्मिक ही नहीं पीपल के वृक्ष का वैज्ञानिक भी महत्व है. 

* प्रात:स्नान के बाद पीपल का स्पर्श करने से व्यक्ति के समस्त पाप भस्म हो जाते है, और लक्ष्मी की प्राप्ति होती है. पीपल वृक्ष की नित्य तीन बार परिक्रमा करने और जल चढाने पर दरिद्रता, दु:ख और दुर्भाग्य का विनाश होता है और आयु में वृद्धि होती है.

* अश्वत्थ वृक्ष को दूध, नैवेद्य, धूप, दीप,फल-फूल, अर्पित करने से मनुष्य को समस्त सुख वैभव की प्राप्ति होती है.

* पीपल की जड़ के निकट बैठकर जो जप, दान, होम, स्तोत्रपाठ, व अनुष्ठान किया जाता है उनका फल अक्षय होता है.

*जड़ से ऊपर तक का तना नारायण कहा गया है और ब्रह्मा, विष्णु, महेश ही इसकी शाखाओ के रूप में स्थित है. पीपल के पत्ते संसार के प्राणियों के समान है. प्रत्येक वर्ष नए पत्ते निकलते है पतझड़ होता, मिट जाते है, फिर नए पत्ते निकलते है, यही जन्म-मरण का चक्र है. 

* पीपल के नीचे किया गया दान अक्षय होकर जन्म-जन्मातर तक फलदायी होता है जिस प्रकार संसार में गौ ब्राह्मण व देवता पूजित है उसी प्रकार पीपल भी पूजा के योग्य है पीपल को रोपने से धन रक्षा करने से पुत्र स्पर्श करने से स्वर्ग और पूजने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

भगवद्गीता में भगवान से कहते हैं - अश्वत्थ: सर्ववृक्षाणाम् (अर्थात् समस्त वृक्षों में मैं पीपल का वृक्ष हूं) कहकर पीपल को अपना स्वरूप बताया है.स्वयं भगवान ने उसे अपनी उपमा देकर पीपल के देवत्व और दिव्यत्व को व्यक्त किया है. इसलिए धर्मशास्त्रों में पीपल के पत्तों को तोडना, इसको काटना या मूल सहित उखाड़ना वर्जित माना गया है. जो व्यक्ति पीपल को काटता है या हानि पहुँचता है उसे एक कल्प तक नरक भोगकर चंडाल की योनि में जन्म लेना पडता है.  

रात में पीपल की पूजा को निषिद्ध माना गया है. क्योंकि ऐसा माना जाता है कि रात्री में पीपल पर दरिद्रता बसती है और सूर्योदय के बाद पीपल पर लक्ष्मी का वास माना गया है. वैज्ञानिक दृष्टि से भी पीपल का महत्तव है. पीपल ही एकमात्र ऎसा वृक्ष है जो रात-दिन ऑक्सीजन देता है.

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
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पूजित वृक्षों की महिमा
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