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पूजित वृक्ष - परिचय

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हमारे हिंदू धर्म में सनातन से वृक्षों को पुजने की परंपरा है,पर अक्सर मन में प्रश्न उठते है कि कुछ वृक्षों की ही हम पूजा क्यों करते है.उनका धार्मिक महत्व क्या है.जिसे हम तुलसी , आँवला , पीपल , वटवृक्ष,  और आज के वैज्ञानिक युग में भी ये बात सिद्ध हो चुकी है.कि पीपल,तुलसी आदि वृक्षों में कुछ खास गुण होते है जिससे वे अन्य वृक्षों से अलग है. सौ वृक्षों का रोपण करना ब्रह्मारूप और हजार वृक्षों का रोपण करने वाला विष्णुरूप बन जाता है.


भविष्य पुराण में ही बताया गया है कि वटवृक्ष मोक्षप्रद, आम्रवृक्ष अभीष्ट कामनाप्रद, सुपारी का वृक्ष सिद्धप्रद, जामुन वृक्ष धनप्रद, बकुल पाप-नाशक, तिनिश बल-बुद्धिप्रद तथा कदम्ब वृक्ष से विपुल लक्ष्मी की प्राप्ति होती है, आंवले का वृक्ष लगाने से अनेक यज्ञों के सदृश पुण्यफल प्राप्त होता है. गूलर के पेड़ में गुरुदत्त भगवान का वास माना गया है, 
पारिजात के वृक्ष के बारे में तो यह बताया गया है कि भगवान श्रीकृष्ण इसे स्वर्ग से लाए थे. 

शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति एक पीपल, एक नीम, दस इमली, तीन कैथ, तीन बेल, तीन आँवला और पाँच आम के वृक्ष लगाता है, वह पुण्यात्मा होता है और कभी नरक के दर्शन नहीं करता. इसी तरह धर्म शास्त्रों में सभी तरह से वृक्ष सहित प्रकृति के सभी तत्वों के महत्व की विवेचना की गई है.

हम घर में भी ऐसे ही देशी वृक्ष या पौधों को लगाकर उनसे मिलने वाले आध्यात्मिक और भौतिक लाभ ले सकते है,फिर हम अन्य सजावट के पौधों को घर में क्यों लगाये,कहते है जब हम किसी भी चीज का महत्व जान लेते है और समझ लेते है तब हम अच्छी तरह से उसमें पुरी श्रद्धा रखकर उसे अपने जीवन में अपना सकते है.तो आईये इसी तरह के कुछ पौधे और वृक्षों के महत्व के बारे में हम जाने.

वृक्षों के आरोपण के लिए वैशाख, आषाढ़, श्रावण तथा भाद्रपद महीने श्रेष्ठ माने गए हैं. अश्विन, कार्तिक व ज्येष्ठ मास वृक्ष के आरोपण के लिए शुभ नहीं माने गए हैं जबकि पर्यावरण दिवस ज्येष्ठ मास में ही मना रहे हैं.
 


DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
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पूजित वृक्षों की महिमा
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