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वन लीलाएँ -परिचय

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जब भगवान 'पौगंड अवस्था' से 'कुमार अवस्था' में आये, (१ वर्ष से लेकर ५ वर्ष की अवस्था को 'पौगंड अवस्था' कहते है इसके बाद की अवस्था 'कुमार अवस्था' कहलाती है ) और गृह लीला से जब भगवान वन में गौ चारण करने लगे तो वन में भगवान की बहुत सी दिव्य लीलाएँ हुई भगवान अपने सखाओ के साथ सुबह होते ही गौए चराने जाते थे और वन में अघासुर वत्सासुर अरिष्टासुर का संहार किया तो वही गोवर्धन धारण लीला ब्रह्माजी का मोह भंग आदि लीलाएँ की.

 

ये सभी भगवान की दिव्य लीलाये है.जिस पर हमारे संतो महापुरुषों ने अपने बड़े ही प्यारे आध्यात्मिक पक्ष रखा है.  

 

"जय जय श्री राधे"

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
Comments
2011-04-14 21:39:21 By KAILASH CHANDRA SHARMA

BRIJKUMAR KI JAY..

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वन लीलाएँ
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