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तुलसी जी के मंत्र

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पंचाग प्रणाम करने का निम्न मंत्र है -

                                       वृन्दाय तुलसी देव्यै प्रियायै केशवस्य च । 
                                       विष्णुभक्तिप्रदे देवी सत्यवत्यै नमो नमः ।।

तुलसी पत्र चयन करने का निम्न मंत्र है -

                                       तुलस्यामृत जन्मासी सदा त्वम् केशव प्रिया । 
                                         केशवार्थ चिनोमी त्वां वरदा भव शोभने ।।

तुलसी जी की प्रदक्षिणा के लिए यह मन्त्र है -

                                          यानि कानि च पापानि ब्रह्महत्यादिकानि च । 
                                           तानि तानि प्रणश्यन्ति प्रदक्षिणः पदे पदे ।।


भावार्थ - जाने अनजाने में किए गए और पूर्वजन्मों के भी सारे पाप आपकी प्रदक्षिणा से  नाश हो जाते है.

तो तीन मन्त्र हैं, एक "प्रणाम" करने के लिए, एक "प्रदक्षिणा" करने के लिए और एक तुलसी पत्र "चयन" के लिए.

तुलसी पत्र दिन में एक बार प्रातः पूजा और भोग अर्पण के समय उपयोग करने के लिए एकत्रित कर लेने चाहिए. हर पात्र या थाली में कम से कम एक तुलसी पत्र होना ही चाहिए.

तुलसी पत्र, श्री विष्णु को अति प्रिय है. सभी विष्णु तत्त्व के विग्रहों को तुलसी पत्र प्रचुर मात्रा में चढ़ाये जाने चाहिए. भगवान् विष्णु को तुलसी पत्र की माला भी प्रिय है. तुलसी पत्र को चन्दन लेप के साथ भगवान् के चरण-कमलों पर स्थापित करना उनकी सर्वोत्तम पूजा है.

परन्तु हमें अत्यंत सावधान रहना चाहिए कि तुलसी पत्र भगवान् विष्णु और उनके विभिन्न रूपों के अतिरिक्त किसी और को न चरणों में न अर्पित किये जाएँ. यहाँ तक की राधारानी और अध्यात्मिक गुरु के चरणों में भी नहीं तुलसी पत्र अर्पित नहीं करने चाहिए.

वे विशेष रूप से भगवान् कृष्ण के चरण-कमलों में अर्पित करने के लिए सुरक्षित हैं. पत्रों को हम भगवान् कृष्ण के चरण कमलों में अर्पित करने हेतु राधारानी की हथेली पर रख सकते हैं.

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
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