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तुलसी नामाष्टक

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तुलसी नामाष्टक 

तुलसी को देवी रुप में हर घर में पूजा जाता है. इसकी नियमित पूजा से व्यक्ति को पापों से मुक्ति तथा पुण्य फल में वृद्धि मिलती है. यह बहुत पवित्र मानी जाती है और सभी पूजाओं में देवी तथा देवताओं को अर्पित की जाती है. तुलसी पूजा करने के कई विधान दिए गए हैं. उनमें से एक तुलसी नामाष्टक का पाठ करने का विधान दिया गया है. जो व्यक्ति तुलसी नामाष्टक का नियमित पाठ करता है उसे अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है. इस नामाष्टक का पाठ पूरे विधान से करना चाहिए. विशेष रुप से कार्तिक माह में इस पाठ को अवश्य ही करना चाहिए.

नामाष्टक पाठ 

वृन्दा वृन्दावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी.

पुष्पसारा नन्दनीच तुलसी कृष्ण जीवनी.

एतभामांष्टक चैव स्तोत्रं नामर्थं संयुतम.

य: पठेत तां च सम्पूज सौsश्रमेघ फलंलमेता..


    तुलसी जी के आठ नाम बताये गए है - 

वृंदा, वृंदावनि, विश्व पूजिता, विश्व पावनी, पुष्पसारा, नन्दिनी, तुलसी और कृष्ण जीवनी


तुलसीजी के नामो के अर्थ -

वृंदा : सभी वनस्पति व वृक्षों की आधि देवी

वृन्दावनी : जिनका उदभव व्रज में हुआ

विश्वपूजिता : समस्त जगत द्वारा पूजित

विश्व -पावनी : त्रिलोकी को पावन करनेवाली

पुष्पसारा : हर पुष्प का सार

नंदिनी : ऋषि  मुनियों को आनंद प्रदान करनेवाली 

कृष्ण -जीवनी : श्री कृष्ण की प्राण जीवनी . 

तुलसी : अद्वितीय
 

"जय जय श्री राधे"

 

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
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