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छै गोस्वामी जी

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हमारे धर्म में नाम-जप को ही वैष्णव धर्म माना गया है और भगवान श्रीकृष्ण को प्रधानता दी गई है। चैतन्य ने इन्हीं की उपासना की और नवद्वीप से अपने छः प्रमुख अनुयायियों को वृंदावन भेजकर वहां सप्त देवालयों की आधारशिला रखवाई।

श्री चैतन्य महाप्रभु जी ने जिस गौड़ीय संप्रदाय की स्थापना की थी। उसमें षड्गोस्वामियों की अत्यंत अहम भूमिका रही। इन सभी ने भक्ति आंदोलन को व्यवहारिक स्वरूप प्रदान किया। साथ ही वृंदावन के सप्त देवालयों के माध्यम से विश्व में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार किया।

 
षड्गोस्वामी 


१.  श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी -
 बहुत कम आयु में ही श्री चैतन्य महाप्रभु जी की कृपा से यहां आ गए थे। दक्षिण भारत का भ्रमण करते हुए श्री चैतन्य महाप्रभु जी चार माह इनके घर पर ठहरे थे। बाद में इन्होंने गौरांग के नाम संकीर्तन में प्रवेश किया.


२.  श्री रघुनाथ भट्ट गोस्वामी जी - ये सदा हरे कृष्ण का अन्वरत जाप करते रहते थे, और श्रीमद भागवत का पाठ नियम से करते थे। राधा कुण्ड के तट पर निवास करते हुए, प्रतिदिन भागवत का मीठा पाठ स्थानीय लोगों को सुनाते थे, और इतने भावविभोर हो जाते थे, कि उनके प्रेमाश्रुओं से भागवत के पन्ने भी भीग जाते थे।


३.  श्रीरूप गोस्वामी जी - 
इन्होंने २२ वर्ष की आयु में गृहस्थाश्रम त्याग कर दिया था। बाद के ५१ वर्ष ये व्रज  में ही रहे.


४.  श्रीसनातन गोस्वामी जी 
 - इन्होने गौड़ीय वैष्णव भक्ति सम्प्रदाय की अनेकों ग्रन्थोंकी रचना की। अपने भाई रूप गोस्वामी सहित वृन्दावन के छ: प्रभावशाली गोस्वामियों में वे सबसे ज्येष्ठ थे।


५.  श्रीजीव गोस्वामी जी - 
 श्री जीव गोस्वामी जी रूप और सनातन जी के भाई अनूप गोस्वामी जी के बेटे थे, श्रीरूप गोस्वामी जी ने इन्हें श्रीमद्भागवत का पाठ कराया। और अन्ततः ये वृंदावन पहुंचे। वहां इन्होंने एक मंदिर भी बनवाया। 


६.  श्री
रघुनाथ दास गोस्वामी -  ने युवा आयु में ही गृहस्थी का त्याग किया, और श्री चैतन्य महाप्रभु जी के साथ हो लिए थे।


इन्होंने वृंदावन में सात वैष्णव मंदिरों की स्थापना की। वे इस प्रकार हैं: - 

१.- "श्री राधागोविंददेव मंदिर",  २.- "श्री राधागोपीनाथ मंदिर, ३.- श्री राधामदनमोहन मंदिर, ४. -"श्री राधारमण मंदिर", ५. - "श्री राधादामोदर मंदिर" , ६. - "श्री राधाश्यामसुन्दर मंदिर" और ७. - "श्रीराधागोकुलानंद मंदिर"  इन्हें सप्तदेवालय कहा जाता है।

 

                                                           "जय जय श्री राधे"
 

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
Comments
2018-12-07 13:11:17 By Bable singh

Shree Radhe ,jai shreel prabhupal

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छै गोस्वामी जी
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