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संत चरणामृत महिमा

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ब्रज मंडल में बहुत से संत हुए,एक वे संत जिनका जन्म ही व्रज मंडल में हुआ और दूसरे वे जिनका जन्म कही और हुआ और वे ब्रज मंडल में आके निवास करने लगे,कई संत पहले हो गए और आज भी है,कई संत तो ऐसे है जो कभी दुनिया कि नजर में आते ही नहीं, व्रज चौरासी कोस में कही भी अपना वास बना लेते है और राधा माधव जी की आराधना में ही अपना जीवन बिताते है.

 

संत जीवन बड़ा विलक्षण होता है,संत की अपनी ही मस्ती अपनी एक दूसरी ही दुनिया होती है,जहाँ वे राधा माधव की उस दिव्य लीलाओ में प्रवेश पाते है और उसी भावराज में खोये रहते है,सच ऐसे संतो के अनुभव,उनकी अनुभूतियाँ यदि सुनने पढ़ने को मिले तो हम संसारियो के लिए तो यही बढ़ी बात है.

संतो की ऐसे तो भगवान की हर चीज में निष्ठा होती है परन्तु संत चरणामृत और संत उच्छिष्ट प्रसाद ने बहुत निष्ठा होती है,और सही भी है,जब ठाकुर जी ही संत रज् लेने के लिए उनके पीछे पीछे भागते है तो फिर एक संत दूसरे संत की चरण रज् लेने को उतावला होगा ही,ऐसे ही कुछ संतो के जीवन परिचय उनकी अनुभूतियो को प्रस्तुत करने की हमारी छोटी सी कोशिश है.आशा है सभी को पसंद आएगी.  

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
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संत चरणामृत महिमा
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