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साधना से प्रभु प्राप्ति

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साधना के माध्यम से प्रभु की प्राप्ति संभव है। इसके अलावा दूसरा कोई माध्यम नहीं है। साधन से सांसारिक चीजों की प्राप्ति होती है, प्रभु की नहीं। प्रभु की प्राप्ति के लिए उनकी कृपा होनी चाहिए। प्रभु की कृपा साधना से ही प्राप्त होगी। ध्रुव ने साधना की बदौलत प्रभु को प्राप्त किया। लोगों को ध्रुव चरित्र से शिक्षा लेने की आवश्यकता है। ध्रुव चरित्र सत्य का मार्ग दिखाएगा।

 

सुनीति व सुरुचि शब्द का मतलब है सुनीति से मतलब शास्त्र की नीति है और सुरुचि से मतलब अपनी नीति है। अपनी नीति से व्यक्ति के भीतर तमोगुण पैदा हो जाता है जबकि शास्त्र की नीति से अच्छाई पैदा होती है। सत्य व धर्म के मार्ग पर व्यक्ति चलता है। हर व्यक्ति को चाहिए कि वह शास्त्र की नीति अपनाएं। इसी नीति को जीवन में अपनाकर व्यक्ति जीवन की सर्वश्रेष्ठ ऊंचाइयों को स्पर्श कर सकता है। प्रभु को प्राप्त कर सकता है।

 

 

"जय जय श्री राधे "


DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
Comments
2011-09-08 21:03:51 By Pt Chandra Sagar

पूज्य गुरुदेव के श्री चरणों में कोटि -कोटि प्रणाम | श्लोको का अति शुद्ध उच्चारण एवं भागवत का सही स्वरुप का दिग्दर्शन हमने आपही से प्राप्त किया | श्लोकों की संगीत मयता केवल आप ही के कंठ में सुशोभित होती हैं |

2011-08-22 18:13:54 By Gulshan Piplani

जन्माष्टमी के सुअवसर पर कोटि कोटि प्रणाम|

2011-08-10 19:53:54 By Vipin Sharma

RADHE RAHDE

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