Theme :
Home
Granth
eBook
Saint
Yatra
Shanka
Health
Pandit Ji

पुरुषोत्तम मास में नियम

  Views : 2189   Rating : 0.0   Voted : 0
Rate Article

इस माह व्रत एवं पूजन करने से यमदूत भी भाग जाते हैं. इसलिए इस माह की बड़ी महिमा है. इस माह में प्रतिदिन स्नान आदि कर स्वच्छ होकर भगवान विष्णु या राधा-कृष्ण की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है.

इस माह चावल, गेहूं, मूंग, जौ, तिल, मटर, अदरक, कंदमूल, चौलाई, ककड़ी, केला, नमक, दही, मक्खन, पनीर, आम, हरड़, जीरा, सोंठ, ईमली, सुपारी, आंवला, आदि ले सकते है पर ये सब तेल में पकाया हुआ नहीं होना चाहिए. मन, वचन और कर्म से पवित्र रहना चाहिए.


क्या न खाए - प्याज, लहसुन, गाजर, मूली, काशीफल (कुम्हड़ा), राई, दाल, गुड़, तिलों का तेल, लोहे से दूषित, भाव से दूषित, क्रिया से दूषित शब्द से दूषित, और साग भेड़,भैस,बकरी का दूध एवं जल में होने वाले फल भगवान विष्णु की प्रसन्नता हेतु न खाएं पिए.अगर पूरा महीना संभव हो सके तो एक शाम ही खाएं. लेकिन बासी एवं दोबारा गर्म किया हुआ भोजन न करें.


कम से कम त्रयोदशी से पूर्णिमा तक तीन दिनों का व्रत अवश्य करें. व्रत के बाद जिस भी वस्तु का आपने त्याग किया है उसका दान अवश्य करें. पूरा मास श्री हरि विष्णु या भगवान कृष्ण के भजन कीर्तन एवं श्रवण में बिताएं. इस प्रकार यह मास हर प्रकार से सभी सुखों को देने वाला है.


पुरुषोत्तम मास में स्त्री-पुरुष दोनों एक मत से महीने भर तक ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें 
.जमीन पर सोवें,शैय्या का त्याग करे.संभव हो तो कुश की चटाई पर सोएं, क्योंकि कुश के मूल में ब्रह्मा मध्य में विष्णु, तथा अग्र भाग में शंकर का वास होता है.

१. - प्रतिदिन घंटे भर किसी भी नियत समय पर मौन रहकर अपनी-अपनी रूचि और विश्वास के अनुसार भगवान् का भजन करें .


२.-
जान-बूझकर झूठ ना बोलें
किसीकी निंदा ना करें.शत्रुता आदि से दूर रहना चाहिए. किसी की बुराई नहीं करनी चाहिए. 

३.- भोजन- 
भोजन और वस्त्रों में जहां तक बन सके, पूरी शुद्धि और सादगी बरतें
. रजस्वला स्त्री का स्पर्श,परस्त्री स्पर्श,न करे. पत्तल पर भोजन करें, भोजन में हविष्यान्न ही खाएं.तांबे के पात्र में दूध,चमड़े के पात्र में पानी,और केवल अपने लिए पकाया हुआ भोजन ये सब दूषित कहे गए है इनका सर्वथा त्याग कर देना चाहिए. केवल फलाहार कर के पूरे मास व्रत कर सकते हैं,एक समय फलाहार और एक समय अन्नाहार कर सकते हैं,सिर्फ एक समय अन्नाहार कर सकते हैं ,अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह कर सकते हैं।

४.-  
माता,पिता,गुरु,स्वामी,ब्राह्मण,स्त्री,वेद,गौ की निंदा न करे न सुने माता-पिता, गुरु आदि बड़ों के चरणों में प्रतिदिन प्रणाम करें 
.भगवान पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण की पूजा करें.

५.- दिन में सोंना नहीं चाहिये,आलस्य और प्रमाद को त्याग देना चाहिये.

पुरुषोत्तम मास में दान देने का और त्याग करने का बड़ा महत्त्व माना गया है, इसलिए जहां तक बन सके, जिसके पास जो चीज़ हो वही योग्य पात्र को प्रतिदिन दान देकर परमात्मा की सेवा करनी चाहिएत्याग करने है तो सबसे पहले, पापों का त्याग करना ही जरूरी है.मानसिक त्याग सर्वोपरि है.
 

इन्द्रियों की आसक्ति, बुरी संगती,मदिरापान करने वाला,में लगे हुए व्यक्तियो से दूर रहे.

उद्यापन- यदि संभव हो, तो मास के अंत में उद्यापन के लिए एक मंडप की व्यवस्था कर योग्य पंडित द्वारा भगवान की षोडशोपचार पूजा कराकर चार-पांच वेदविद् ब्राह्मणों द्वारा चतुर्व्यूह का जप कराना चाहिए। फिर दशांश हवन कराकर नारियल का होम करना चाहिए। गौओं को घास तथा दाना देना चाहिए। ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। वैष्णवों को यथाशक्ति वसु-सोना, चांदी आदि एवं गाय, घी, अन्न, वस्त्र, पात्र, जूता, छाता आदि और गीता-भागवत आदि पुस्तकों का दान करना चाहिए। कांसे के बर्तन में तीस पूए रखकर संपुट करके ब्राह्मण-वैष्णव को दान करने वाला अक्षय पुण्य का भागी होता है।
पुरुषोत्तम मास में भक्ति पूर्वक अध्यात्म विद्या का श्रवण करने से ब्रह्म-हत्यादि जनित पाप नष्ट होते हैं। पितृगण मोक्ष को प्राप्त होते हैं तथा दिन-प्रतिदिन अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है। यह व्रत निष्काम भाव से किया जाए, तो व्यक्ति पापमुक्त हो जाता है।
 

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
Comments
Enter comments


 
व्रत कथाएँ
Last Viewed Articles
eBook Collection
सभी किताबे
राधा संग्रह
ग्रन्थ
कृष्ण संग्रह
व्रज संग्रह
व्रत कथाएँ
यात्रा
DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
Copyright © radhakripa.in>, 2010. All Rights Reserved
You are free to use any content from here.