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पुरुषोत्तम -मास में भक्ति सम्बन्धी नियम

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पुरुषोत्तम - मास में पालन करने वाले नियम निम्नवत् हैं

1- ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए ।


2--बढ़ते हुए क्रम में जप करना चाहिए और अपनी तय की हुई जपसंख्या को नित्य करना चाहिए 
जैसे - 16,25,32,64....

3--भगवत गीता का पाठ करना चाहिए विशेष रूप से पाठ 15 जो की पुरुषोत्तम योग नाम से जाना जाता है ,श्रीमद् भागवत तथा चैतन्य चरितामृत का पाठ करना चाहिए ।

4-- नित्य हरि कथा सुननी या पढनी चाहिए (श्री कृष्ण पुस्तक से पढ़ सकते हैं जैसे भगवान की व्रजलीला और कुरुक्षेत्र में गोपियों से मिलन प्रसंग) 

5--राधा कृष्ण के विग्रह या फोटो जो भी है उस पर कमल ,गुलाब तथा तुलसी माला चढा कर पूजा करनी चाहिए ।

6--नित्य शुद्ध गाय के घी का दीप राधाकृष्ण के विग्रह /चित्र के समक्ष प्रज्वलित करना चाहिए ।

7-- नित्य जगन्नाथ अष्टकम गाना चाहिए ।

भजन तथा कीर्तन भी करना चाहिए विशेष रूप से युगल किशोर का गुणगान करने वाले जैसे --
जय राधा माधव , राधे जय जय माधव दयिते, राधा कृष्ण प्रान मोरा, राधा कृपा कटाक्ष आदि। 

8-- वैष्णव, ब्राम्हण ,गरीब और जरूरतमंद को दान अपनी क्षमता के अनुरूप देना चाहिए ।

9---सदैव प्रसादम् खाना चाहिए अर्थात कृष्ण को जो अर्पित किया हो। 

10--नित्य राधा कुंड/ यमुना जी में स्नान करना चाहिए यह सुविधा नहीं है तो घर में राधा कुंड / यमुना जी के जल की कुछ बुंदे डाल कर और उन्हें प्रणाम करके स्नान इस भाव से करना चाहिए कि राधा कुंड / यमुना जी में ही स्नान कर रहे है। 

ये मास श्री ठाकुर जी को अत्यंत प्रिय है और इस मास में श्री ठाकुर जी के निमित्त किया जाने वाला
भजन, पूजा, जप, तप, सेवा, दान,परिक्रमा, धाम यात्रा, स्नान, नाम, संकीर्तन, उत्सव , नियम कभी निष्फल नहीं जाता उसका कई गुना फल प्राप्त होता है और ठाकुर जी अति शीघ्र प्रसन्न होते है और वो भक्त ठाकुर को अत्यंत प्रिय होते हैं जो पुरुषोत्तम मास में ठाकुर जी की सेवा करते है.

इसलिए इस मास में

1. नियम प्रारंभ करना चाहिए
2. परिक्रमा लगानी चाहिए
3.अस्टयाम सेवा करनी चाहिए
4. नाम संकीर्तन करना चाहिए
5. धाम यात्रा करनी चाहिए
6. दान करना चाहिए (दीपदान अवश्य करे)
7. जाप करना चाहिए
8. अन्न दान करना चाहिए
9. गंगा,जमुना स्नान करना चाहिए
10. ध्यान करना चाहिए
11. मानसिक और शारीरिक सेवा करनी चाहिए
12. कथा सुननी चाहिए
13. उत्सव करने चाहिए
14.  दर्शन करने चाहिए

इसलिए मैं आप सभी से प्रार्थना करना चाहता हूं के कृपया इस मास में श्री ठाकुर जी को प्रसन्न करने के लिए कुछ समय निकाल कर कोई ना कोई नियम अवश्य लीजिए श्री ठाकुर जी को प्रसन्न करने के लिए इस मास में कोई भी उत्सव किया जा सकता है.

                                  गोवर्धनधरं वन्दे गोपालं गोपरुपिणम | 

                               गोकुलोत्सवमिशानं गोविन्दं गोपिका प्रियं | | 

हे भगवान ! हे गिरिराज धर ! गोवर्धन को अपने हाथ में धारण करने वाले हे हरि ! हमारे विश्वास और भक्ति को भी तू ही धारण करना | प्रभु आपकी कृपा से ही मेरे जीवन में भक्ति बनी रहेगी, आपकी कृपा से ही मेरे जीवन में भी विश्वास रूपी गोवर्धन मेरी रक्षा करता रहेगा | हे गोवर्धनधारी आपको मेरा प्रणाम है आप समर्थ होते हुए भी साधारण बालक की तरह लीला करते थे |

गोकुल में आपके कारण सदैव उत्सव छाया रहता था मेरे ह्रदय में भी हमेशा उत्सव छाया रहे साधना में, सेवा-सुमिरन में मेरा उसाह कभी कम न हो | मै जप, साधना सेवा,करते हुए कभी थकूँ नहीं | मेरी इन्द्रियों में संसार का आकर्षण न हो, मैं आँख से तुझे ही देखने कि इच्छा रखूं, कानों से तेरी वाणी सुनने की इच्छा रखूं, जीभ के द्वारा दिया हुआ नाम जपने की इच्छा रखूं ! हे गोविन्द ! आप गोपियों के प्यारे हो ! ऐसी कृपा करो, ऐसी सदबुद्धि दो कि मेरी इन्द्रियां आपको ही चाहे ! मेरी इन्द्रियरूपी गोपीयों में संसार की चाह न हो, आपकी ही चाह हो ! 

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
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