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पंचाग

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पाँच अंगो के मिलने से पंचाग बनता हैये पाँच अंग इस प्रकार हैं:- 

1.तिथि (Tithi)
2.- वार (Day)
3.- नक्षत्र (Nakshatra)
4.- योग (Yog)
5.- करण (Karan)


भगवान श्री राम पंचाग का श्रवण करते थे. क्योकि "तिथि" के श्रवण से लक्ष्मी , "वार" से आयु-वृद्धि, "नक्षत्र" से पाप-नाश,"योग" से प्रिय-जन-वियोग नाश, और "करण" के श्रवण से सब प्रकार कि मनोकामना पूर्ण होती है.तो आईये हम भी पंचाग के बारे में जाने और उसका पठन और श्रवण करे.


१. तिथि (Tithi)- एक दिन को तिथि कहा गया है जो पंचांग के आधार पर उन्नीस घंटे से लेकर चौबीस घंटे तक की होती है। चंद्र मास में ३० तिथियाँ होती हैं, जो दो पक्षों में बँटी हैं। 

तिथियाँ निम्न प्रकार से हैं:-

1. - 
प्रतिपदा (Pratipada) (परिवापडिवा/परमा)

2. - द्वितीया (दूजदोज)
3. - तृतीया (तीज
4. - चतुर्थी (चौथ)
5. - पंचमी (पाँचे
6. - षष्टी (षष्टछटेंछट
7. - सप्तमी (सातें
8. - अष्टमी (आठें)
9. - नवमी (नमें)
10.- दशमी (दसें)
11.- एकादशी (ग्यारस
12.- द्वादशी (बारस)
13.- त्रयोदशी (तेरस)
14.- चतुर्दशी ( चौदस)
15. - पूर्णिमा (पूनों)
30.- अमावस्या (अमावस)


२. वार (Day) -
एक सप्ताह में सात दिन होते हैं:- रविवार, सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार। 


3. नक्षत्र (Nakshatra)- 
आकाश में तारामंडल के विभिन्न रूपों में दिखाई देने वाले आकार को नक्षत्र कहते हैं। मूलत: नक्षत्र 27 माने गए हैं। ज्योतिषियों द्वारा एक अन्य अभिजित नक्षत्र भी माना जाता है। चंद्रमा उक्त सत्ताईस नक्षत्रों में भ्रमण करता है। 

नक्षत्रों के नाम इस प्रकार हैं- 
चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़, उत्तराषाढ़, सतभिषा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वभाद्र, उत्तरभाद्र, अश्विन, रेवती, भरणी, कृतिका, रोहणी, मृगशिरा, उत्तरा, पुनवर्सु, पुष्य, मघा, अश्लेशा, पूर्वफाल्गुन, उत्तरफाल्गुन, हस्त.


4.
योग (Yog)- 
योग 27 प्रकार के होते हैं। सूर्य-चंद्र की विशेष दूरियों की स्थितियों को योग कहते हैं। दूरियों के आधार पर बनने वाले 27 योगों के नाम क्रमश: 

इस प्रकार हैं:- विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यातीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इन्द्र और वैधृति।


5. करण (Karan)- 
एक तिथि में दो करण होते हैं- एक पूर्वार्ध में तथा एक उत्तरार्ध में। कुल 11 करण होते हैं- बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पाद, नाग और किस्तुघ्न। 


पक्ष - प्रत्येक महीने में तीस दिन होते हैं। तीस दिनों को चंद्रमा की कलाओं के घटने और बढ़ने के आधार पर दो पक्षों यानी शुक्ल
पक्ष और कृष्ण पक्ष में विभाजित किया गया है। एक पक्ष में लगभग पंद्रह दिन या दो सप्ताह होते हैं। एक सप्ताह में सात दिन होते हैं।

 

इन बारह मासों के नाम आकाशमण्डल के नक्षत्रों में से १२ नक्षत्रों के नामों पर रखे गये हैं। जिस मास जो नक्षत्र आकाश में प्राय: रात्रि के आरम्भ से अन्त तक दिखाई देता है या कह सकते हैं कि जिस मास की पूर्णमासी को चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उसी के नाम पर उस मास का नाम रखा गया है। 

चित्रा नक्षत्र के नाम पर "चैत्र मास" (मार्च-अप्रैल), विशाखा नक्षत्र के नाम पर "वैशाख मास" (अप्रैल-मई), ज्येष्ठा नक्षत्र के नाम पर "ज्येष्ठ मास" (मई-जून), आषाढ़ा नक्षत्र के नाम पर "आषाढ़ मास' (जून-जुलाई), श्रवण नक्षत्र के नाम पर "श्रावण मास" (जुलाई-अगस्त), भाद्रपद (भाद्रा) नक्षत्र के नाम पर "भाद्रपद मास" (अगस्त-सितम्बर), अश्विनी के नाम पर "आश्विन मास" (सितम्बर-अक्तूबर), कृत्तिका के नाम पर "कार्तिक मास" (अक्तूबर-नवम्बर), मृगशीर्ष के नाम पर "मार्गशीर्ष' (नवम्बर-दिसम्बर), पुष्य के नाम पर "पौष" (दिसम्बर-जनवरी), मघा के नाम पर "माघ' (जनवरी-फरवरी) तथा फाल्गुनी नक्षत्र के नाम पर "फाल्गुन मास" (फरवरी-मार्च) का नामकरण हुआ है।
 

                                                        "जय जय श्री राधे"
 

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
Comments
2011-11-29 18:38:44 By bidyaramkhuswaha

ramramramramram

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