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श्री नाथ जी मंदिर - परिचय

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ब्रज में कई प्राचीन प्रमुख मंदिर हैं।ऐसे कई मंदिर हैंजहां के प्रभु बाहर रहने को गए। ऐसे ही मंदिरों में से एक प्रमुख मंदिर श्रीनाथ जी मंदिर है। यह गोवर्धन गिरिराज महाराज की परिक्रमा मार्ग स्थित जतीपुरा में पर्वत के ऊपर स्थापित है। इस मंदिर की प्रतिष्ठा पुष्टि मार्गीय सम्प्रदाय के आचार्य श्रीबल्लभाचार्य जी ने संवत् 1576 में कराई गई थी।


स्थान -
"नाथद्वारा" पश्चिमी भारत के राजस्थान राज्य में एक शहर है. नाथद्वारा दुनिया प्रसिद्ध, बहुत लोकप्रिय और पवित्र उत्तर पश्चिम भारत का शहर है. यह भी प्रधान पुष्टिमार्ग वैष्णव संप्रदाय या भगवान श्री नाथ जी के शहर के लिए जाना जाता है.  नाथद्वारा पश्चिमी भारत के राजस्थान राज्य में एक शहर है,श्री नाथ जी का मंदिर ५५० साल पुराना है.

 

विग्रह - श्री नाथ जी (बाल भगवान कृष्ण) 


स्थापना -
 कहते हैं कि संवत् 1726 में ब्रज में औरंगजेब द्वारा किये गये मंदिरों के ध्वंस के डर से श्री नाथ जी को अर्धरात्रि में रथ में विराजमान कर उन्हें लम्बी यात्रा कर राजस्थान के नाथद्वारा ले गईं। तभी से श्रीनाथ जी नाथद्वारा में विराजमान हैं। कहते हैं कि उनका शयन जतीपरा में और मंगला यानी सुबह जागने की प्रक्रिया नाथद्वारा में होती है।


मथुरा के निकट जतीपुरा ग्राम में श्री गोवर्धन पर्वत पर भगवान श्रीनाथजी प्रकट हुये. 
श्रीमहाप्रभुवल्लभाचार्यजी संवत 1549 की फ़ाल्गुन शुक्ल 11 को झारखण्ड की यात्रा पर शुद्वाद्वैत का प्रचार कर रहे थे। श्रीनाथजी ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दे आदेश प्रदान किया कि ब्रजलोक में मेरा प्राकट्य हो चुका है, आप यहाँ आयें और मुझे प्रतिष्ठित करें। वे झारखण्ड की यात्रा बीच में ही छोड मथुरा होते हुये जतीपुरा पहँचे. श्रीमहाप्रभुवल्लभाचार्यजी सभी को साथ ले श्रीगोवर्धन पर्वत पर पहँचे और श्रीनाथजी का भव्य मंदिर निर्माण कराया और ब्रजवासियों को श्रीनाथजी की सेवा आराधना की विधिवत जानकारी प्रदान कर उन्हें श्रीनाथजी की सेवा में नियुक्त किया।

मुगल सम्राट औरंगजेब का शासन काल (सं. १७०५-१७६४) ब्रज के हिन्दुओं के लिए बडे संकट का युग था। उस धर्मोन्ध बादशाह ने राज्याधिकार प्राप्त करते ही अपने मजहबी तास्मुब के कारण ब्रज के हिन्दुओं को बलात् मुसलमान बानाने का भारी प्रयत्न किया, और उनके मन्दिर-देवालयों को नष्ट-भ्रष्ट करने का प्रबल अभियान चलाया था। तब श्रीनाथजी को सुरक्षित स्थान पर बिराजमान कराने का निर्णय किया। प्रभु का रथ भक्तों के साथ चल पडा, मेवाड में पधारने पर रथ का पहिया सिंहाड ग्राम (वर्तमान श्रीनाथद्वारा) में आकर धंस गया, तब प्रभु को यहीं बिराजमान कराने का निश्चय किया गया.और आज भी प्रभु राजस्थान के नाथद्वारा में विराजमान है.

झाँकी दर्शन - सुप्रभात सत्र :-  1.मंगला 2.श्रीनगर 3.ग्वाल 4.राजभोग.  शाम सत्र : - 5. उत्थापन 6.भोग 7.आरती 8. शयन. 

 

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
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श्रीनाथ जी मंदिर
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