Theme :
Home
Granth
eBook
Saint
Yatra
Shanka
Health
Pandit Ji

वृंदावन का निधिवन

  Views : 2683   Rating : 4.2   Voted : 5
Rate Article

वृंदावन श्यामा जू और श्रीकुंजविहारीका निज धाम है. यहां राधा-कृष्ण की प्रेमरस-धाराबहती रहती है. मान्यता है कि चिरयुवाप्रिय-प्रियतम श्रीधामवृंदावन में सदैव विहार में संलग्न रहते हैं. यहां निधिवन को समस्त वनों का राजा माना गया है, इसलिए इनको श्रीनिधि वनराज कहा जाता है. पंद्रहवीं शताब्दी में सखी-संप्रदाय के प्रवर्तक संगीत सम्राट तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास जब वृंदावन आए, तब उन्होंने निधिवन को अपनी साधनास्थली बनाया.

 

ऐसा कहा जाता है कि स्वामी हरिदासनिधिवन में कुंजबिहारी को अपने संगीत से रिझाते हुए जब तानपूरे पर राग छेडते थे, तब राधा-कृष्ण प्रसन्न होकर रास रचाने लग जाते थे. यह रास-लीला उनके शिष्यों को नहीं दिखती थी. विहार पंचमी को लेकर कथा है कि अपने भतीजे और परमप्रिय शिष्य वीठलविपुलजी के अनुरोध पर उनके जन्मदिवस मार्गशीर्ष-शुक्ल-पंचमी के दिन स्वामी जी ने जैसे ही तान छेडी, वैसे ही श्यामा-श्याम अवतरित हो गए. स्वामीजी ने राधा जी से प्रार्थना की वे कुंजविहारी में ऐसे समा जाएं, जैसे बादल में बिजली. स्वामी जी के आग्रह पर प्रियाजी अपने प्रियतम में समाहित हो गई. इस प्रकार युगल सरकार की सम्मिलित छवि बांकेबिहारीके रूप में मूर्तिमान हो गई और अगहन सुदी पंचमी (मार्गशीर्ष शुक्ला पंचमी) विहार पंचमी के नाम से प्रसिद्ध हो गई.

निधिवन में श्यामा-श्यामसुंदर के नित्य विहार के विषय में स्वामी हरिदासजी द्वारा रचित काव्य ग्रंथ केलिमाल पर्याप्त प्रकाश डालता है. 110पदों वाला यह काव्य वस्तुत:स्वामीजी के द्वारा समय-समय पर गाये गए ध्रुपदोंका संकलन है, जिनमें कुंजबिहारीके नित्य विहार का अतिसूक्ष्मएवं गूढ भावांकन है.

 

"माई री सहज जोरी प्रकट भई जु रंग की गौर श्याम धन दामिनी जैसे !

प्रथम हूँ हुती अबहूँ आगे हूँ रहिहै ना ट रिहै तैसे !

अंग अंग की उजराई सुधराई चतुराई सुंदरता ऐसे !

श्री हरि दास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी सम वैसे वैसे " !


 

ऐसी कहा जाता है निधिवन के सारी लताये गोपियाँ है जो एक दूसरे कि बाहों में बाहें डाले खड़ी है जब रात में निधिवन में राधा रानी जी, बिहारी जी के साथ रास लीला करती  है तो वहाँ की लताये गोपियाँ बन जाती है,और फिर रास लीला आरंभ होती है,इस रास लीला को कोई नहीं देख सकता,दिन भर में हजारों बंदर, पक्षी,जीव जंतु निधिवन में रहते है पर जैसे ही शाम होती है,सब जीव जंतु बंदर अपने आप निधिवन में चले जाते है एक परिंदा भी फिर वहाँ पर नहीं रुकता यहाँ तक कि जमीन के अंदर के जीव चीटी आदि भी जमीन के अंदर चले जाते है रास लीला को कोई नहीं देख सकता क्योकि रास लीला इस लौकिक जगत की लीला नहीं है रास तो अलौकिक जगत की "परम दिव्यातिदिव्य लीला" है कोई साधारण व्यक्ति या जीव अपनी आँखों से देख ही नहीं सकता. जो बड़े बड़े संत है उन्हें निधिवन से राधारानी जी और गोपियों के नुपुर की ध्वनि सुनी है.

 

जब रास करते करते राधा रानी जी थक जाती है तो बिहारी जी उनके चरण दबाते है. और रात्रि में शयन करते है आज भी निधिवन में शयन कक्ष है जहाँ पुजारी जी जल का पात्र, पान,फुल और प्रसाद  रखते है, और जब सुबह पट खोलते है तो जल पीला मिलता है पान चबाया हुआ मिलता है और फूल बिखरे हुए मिलते है.  

 

एक बार की बात है जब एक व्यक्ति रास लीला देखने के लिए निधिवन में झाडियों में छिपकर बैठ गया.जब सुबह हुई तो वह व्यक्ति निधिवन के बाहर विक्षिप्त अवस्था में पड़ा मिला लोगो ने उससे पूंछा पर वह कुछ भी नहीं बोला सात दिन तक उसने ना कुछ खाया ना पिया और ना ही कुछ बोला सात दिन बाद उसने एक कागज पर लिखा कि मेने राधा रानी और बिहारी जी को रास लीला करते अपनी इन आँखों से देखा है और इतना लिखकर वह मर गया. क्योकि एक तो कोई उनकी उस लीला को देख नहीं सकता और कोई अगर देख लेता है तो फिर वह इस जगत का नहीं रहता.

 

 

हमने जो संतो के श्री मुख से सुना और पढ़ा उसी को लिखने कि छोटी सी कोशिश है क्योकि उस दिव्यातिदिव्य लीला के बारे में और निधिवन के बारे में हम और हमारे शब्द पर्याप्त नहीं है राधा रानी और बिहारी जी जैसे अनंत है अपार है वैसे ही उनकी लीलाएँ भी अनंत और अपार है.

 

"जय जय श्री राधे" 



DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
Comments
2011-10-03 20:38:39 By Nitu Nema

Nice Article
Radhe Radhe

2011-08-07 00:37:07 By Gulshan Piplani

वृन्दावन श्यामा है श्री कुञ्ज विहारी का निजधाम| तानपुरे राग छेड़ हरिदास जपे हरि सुबहो - शाम||

2011-07-20 02:47:37 By Rajender Kumar Mehra

nidhi van jahan shreejee thakurjee sakhiyon ke saath raas karte hain bada hi manoram jagah khaas taur par murli chor radha rani ka vigrah dekh man jhoom uthta hai.....radhe radhe

2011-04-03 01:07:11 By Rajesh Malviya

-: जय जय श्री राधे :- !!! राधरानी की जय महारानी की जय !!!

2011-04-03 01:07:11 By Rajesh Malviya

-: जय जय श्री राधे :- !!! राधरानी की जय महारानी की जय !!!

2011-04-03 01:07:10 By Rajesh Malviya

-: जय जय श्री राधे :- !!! राधरानी की जय महारानी की जय !!!

2011-04-03 01:07:09 By Rajesh Malviya

-: जय जय श्री राधे :- !!! राधरानी की जय महारानी की जय !!!

2011-04-03 01:05:57 By Rajesh Malviya

-: जय जय श्री राधे :- !!! राधरानी की जय महारानी की जय !!!

2011-03-15 20:55:13 By raj

jai shree krisna..................

2011-03-11 04:27:45 By sudarshan das

achha laga a lek radheradhe

2011-03-08 18:37:47 By Radha Kumar

jai jai shree radhey ......

2011-03-08 18:37:47 By Radha Kumar

jai jai shree radhey ......

Enter comments


 
कृष्ण कन्हैया
Last Viewed Articles
eBook Collection
सभी किताबे
राधा संग्रह
ग्रन्थ
कृष्ण संग्रह
व्रज संग्रह
व्रत कथाएँ
यात्रा
DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
Copyright © radhakripa.in>, 2010. All Rights Reserved
You are free to use any content from here.