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श्री कृष्णा-परिचय

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प्रत्येक युग में भगवान शरीर ग्रहण करते  है, पिछले युगो में  क्रमश: श्वेत, रक्त, और पीत, ये तीन विभिन्न रंग स्वीकार किये थे, अब की द्वापर युग में कृष्णवर्ण हुआ है, इसलिए इसका नाम कृष्ण है. वासुदेव के घर भी पैदा हुए,इसलिए इस रहस्य को जानने वाले लोग इसे ‘श्रीमान् वासुदेव’ भी कहते है.

 

श्री कृष्ण स्वयं भगवान हैं, अतएव उनके द्वारा सभी लीलाओं का सुसम्पन्न होना इष्ट है। वे ही सबके हृदयों में व्याप्त अन्तर्यामी हैं, वे ही सर्वातीत हैं और वे ही सर्वगुणमय, लीलामय, अखिलरसामृतमूर्ति श्री भगवान हैं. उनके प्राकट्य में भी विभिन्न कारण हो सकते हैं और वे सभी सत्य हैं. भगवान श्री कृष्ण के प्राकट्य का समय था, भाद्रपद अष्टमी की अर्धरात्रि और स्थान था अत्याचारी कंस का कारागार. पर स्वयं भगवान के प्राकट्य से काल, देश आदि सभी परम धन्य हो गये. उस मंगलमयी घटना को हुए पाँच हजार से अधिक वर्ष बीत चुके हैं परन्तु आज भी प्रति वर्ष श्री कृष्ण जी का प्राकट्योत्सव वही पवित्र भाद्रपद मास के पावनमयी कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है.

 

भगवान के चौबीस अवतार प्रसिद्ध है, कुछ विद्वान चौबीस की संख्या यो पूर्ण करते है, राम-कृष्ण के अतिरिक्त बीस अवतार तो उपयुक्त है शेष चार अवतार श्रीकृष्ण के ही अंश है स्वयं कृष्ण तो पूर्ण परमेश्वर है वे अवतार नहीं, अवतारी है, अतः श्रीकृष्ण को अवतारों की गणना में नहीं गिनते, उन्होंने यदुवंश में ‘बलराम और श्रीकृष्ण’ के रूप में अवतार लिया .

 

"जय जय श्री राधे "

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
Comments
2011-11-23 22:25:00 By amit kurmi

श्री कृष्ण का जीवन परिचय और उनके उपनाम

2011-08-22 03:34:10 By Neeru Arora

radhey radhey

2011-08-19 00:20:39 By

shri krishna

2011-04-28 20:16:46 By deepak

श्री राधे-राधे

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कृष्ण कन्हैया
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