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बरसाना श्रीराधा जी का ह्रदय है

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बरसाना श्रीराधारानी का ह्रदय कमल है और इस हृदय कमल पर निरंतर उपस्थित भँवरा श्रीकृष्ण है


जैसे भँवरा पुष्पों के रस का अस्वादन करता है वैसे ही श्रीकृष्ण रूपी भँवरा निरंतर श्रीराधा ह्रदय कमल रूपी बरसाने के रस का आस्वादन करता रहता है.


जो बात महारसिकजन नित करते रहते है जिन श्रीयुगल के रोम रोम से ब्रज रस चूता रहता है और जिस ब्रज रस से ब्रजमंडल जीवंत है वह सारे ब्रज रस का केंद्र बरसाना है वहीं से समस्त ब्रज रस प्रकट भाव से युगल विग्रह से चूता है


बरसाना रस महाभाव रस है जिस महाभाव रस मे कृष्ण कृष्ण नहीं " सखी" बन जाते है


और सखी भाव से उस महाभाव रस का अस्वादन करते है 
जहाँ श्रीकृष्ण आवृत हो जाते है राधा प्रेम से उसे श्री ग़ौर कहते है

और जहाँ श्रीकृष्ण आवृत हो सखी बन जाते है उस प्रगाढ़ प्रेम भाव को बरसाना कहते है

 

 

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
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