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कलयुग कब और कैसे आया

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जब महाभारत का युद्ध समाप्त हो गया और भगवान श्री कृष्ण अपनी लीला का संवरण करके चले गए तो पांडवो ने भी अर्जुन के पौत्र और अभिमन्यु के बेटे परीक्षित का राज अभिषेक करके स्वर्गारोहण किया . पाण्डवों के स्वर्ग जाने के पश्चात राजा परीक्षित ऋषि-मुनियों के आदेशानुसार धर्मपूर्वक शासन करने लगे। उनके जन्म के समय ज्योतिषियों ने जिन गुणों का वर्णन किया था, वे समस्त गुण उनमें विद्यमान थे। उनका विवाह राजा उत्तर की कन्या इरावती से हुआ। उससे उन्हें जनमेजय आदि चार पुत्र प्राप्त हुए। इस प्रकार वे समस्त ऐश्वर्य भोग रहे थे। 

एक बार दिग्विजय करते हुए परीक्षित सरस्वती नदी के तट पर पहुंचे। राजा ने छिपकर देखा.  तो गौ रो रही थी.भगवान श्रीकृष्ण के जाने के साथ ही पृथ्वी पर कलयुग का आगमन हो गया था। इस युग में प्राणी पापाचार में लिप्त हो जाएंगे। यही सोचकर पृथ्वी अत्यंत दुःखी थी. 


तब बैल ने उससे कहा- तुम क्यों रही हो ? मेरा एक पैर बचा है क्या तुम मेरी इस हालत पर रो रही हो. वास्तव में वृषभ-रूप में धर्म तथा गाय-रूप में पृथ्वी थी. 


तब बैल ने कहा - सतयुग में मेरे (धर्म के) -पवित्रता, तप, दया और सत्य-ये चार चरण थे। किंतु कलयुग में गर्व, मोह और मद के कारण मेरे तीन चरण नष्ट हो गए हैं।अब केवल एक ही चरण बचा है सत्य जिसपर मै स्थित हूँ.  तभी वहां उन्होंने देखा कि एक राजवेषधारी शूद्र हाथ में डंडा लिए एक पैर वाले वृषभ (बैल) और अति दुर्बल गाय को निर्दयता से पीटने लगा वह वृषभ भय से कांपता हुआ एक पैर पर खड़ा था और गाय उस शूद्र के पांवों के पास गिर कर उसकी ठोकरें खा रही थी। 


यह वीभत्स दृश्य देखकर परीक्षित क्रोधित होकर बोले-“ठहर जा दुष्ट! तू कौन है, जो इन निर्दोष और दुर्बल प्राणियों पर अत्याचार कर रहा है? यद्यपि तूने राजा का वेष धारण कर रखा है, किंतु तेरा कर्म तेरे शूद्र होने की बात कह रहा है। तूने मेरे राज्य में यह कार्य कर घोर अपराध किया है। इसलिए तेरा वध ही तेरे लिए उचित दण्ड है।”

परीक्षित ने धर्म और पृथ्वी को सांत्वना दी और म्यान से तलवार निकालकर आगे बढ़े। कलयुग ने देखा कि अब परीक्षित उसे मार ही डालेंगे तो उसने अपना राजसी वेश त्याग दिया और भय से व्याकुल होकर उनके चरणों में मस्तक झुका दिया। परीक्षित परम दयालु थे। जब उन्होंने कलयुग को अपनी शरण में देखा तो उनका मन दया से भर आया।


उन्होंने उसके रहने के लिए ये स्थान बता दिए-

१. जुआ
- जहाँ जुआ खेला जाता है.

२. स्त्री-
जहाँ परस्त्री गमन होता है.


३. मद्य-
जहाँ लोग शराब पीते है.

४. हिंसा -
जहाँ हिंसा होती है.इस प्रकार जब राजा परीक्षित ने कलयुग को चार स्थान दिए तो वह बोला कोई एक और जगह दीजिये.

तब राजा ने कहा -तुम स्वर्ण (सोना)में भी वास कर सकते हो.(यहाँ स्वर्ण का अर्थ अनीति से कमाये धन से है.) इनके साथ-साथ मिथ्या, मद, काम, हिंसा और वैर-ये पांच वस्तुएं भी कलि को दे दीं।


राजा आखेट के लिए निकले थे जैसे ही स्वर्ण में रहने का स्थान दिया तो राजा उस दिन जो मुकुट पहने था वह जरासंध राजा का था जो भीम ने जबरजस्ती उससे छीन लिया था. इसलिए कलि उनके मुकुट में  आकर बैठ गया. 


कलयुग राजा परीक्षित के सिर पर सवार था ही। उस दिन उन्हें दिनभर घुमने पर भी शिकार नहीं मिला और उनके सैनिक भी पीछे छुट गए वे भूखे प्यासे एक आश्रम में पहुँचे तब उन्होंने एक ऋषि को देखा.जो समाधि में थे तब उन्होंने जल कि याचना की परन्तु ऋषि तो समाधि में थे इसलिए उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया.

इस पर उनके सिर पर सवार कलि ने उनकी बुद्धि खराब कर दी और कहा -  ये ढोग कर रहा है इसे मार डाल .परन्तु अच्छे संस्कार के कारण राजा ने उन्हें मारा तो नहीं क्रोधवश भूखे और प्यासे होने के कारण उनके गले में मरे सर्प को डाल दिया. क्योंकि ऋषि ध्यानमग्न थे, अतः परीक्षित का स्वागत नहीं कर सके थे। और आश्रम से चले गए. मुनि के श्रृंगी नामक पुत्र ने जब यह सुना तो परीक्षित को श्राप दे दिया कि आजा से सातवे दिन तक्षक नाग द्वारा कटने से आपकी मृत्यु हो जायेगी.   


इस प्रकार पृथ्वी पर कलयुग का आगमन हुआ और इसका पहला शिकार इसे शरण देने वाले परीक्षित ही बने। कलयुग की आयु 4,32,000 वर्ष कही गई है। इसका आरंभ 3102 वर्ष ईसा पूर्व से हुआ।

                                                                     
                                                                               "जय जय श्री राधे"


DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
Comments
2011-09-23 01:07:13 By Anshu Prasad

i like it

2011-09-17 01:59:53 By Ashok Khera

Its a laudable effort towards creating awareness amongst Krisna devotees, especially the young ones, the importance and sea-depth of Srimad Bhagwat. Kudos to you Manish. Keep it up. Jai Shri Radhey.

2011-09-12 16:45:08 By Gulzar

aapka yh lekh acha hai , isko kalyoug ka naam diya ye bhi thik hai but mujhe isme aapne jo sudher shabd ka upyog kiya hai wh sarasar galat hai , aur jis yug ki baat aap kh rhe hai us yug me sudher bhla kha Raja ka bhesh bna sakta hoga ,ha agar aap uske karm se usko sudhr kh rhe hai to , aap usko akstri artath yodha kyo nhi khete , meri aapse prarthna hai is lekh se sudher shabad ko nikaal lijiye. sudher ko apne khaane-pine tak ke laale pde hote hai wo Raja ke besh kaise bna lega

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