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कबीरदासजी -जीवन परिचय

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कबीरदास जी भक्ति आंदोलन के एक उच्च कोटि के कवि, समाज सुधारक, प्रवर्तक माने जाते है.इनका जन्म सं१४५५ में हुआ था.कबीर ने जुलाहे का व्यसाय अपनाया था.इनका निधन १५७५ में मगहर में हुआ था.कबीर कवि ही नही थे,बल्कि एक युग-पुरूष की श्रेणी में भी आते है.भक्तिकाल में ही नही,सम्पूर्ण हिन्दी साहित्य में कबीर जैसी प्रतिभा और साहस वाला कोई कवि दूसरा पैदा नही हुआ. उन्होंने भक्तिकाल का एकान्तिक आनंद जितना अपनाया है,उससे भी अधिक सामाजिक परिष्कार का दायित्व निर्वाह किया है.


काशी के इस अक्खड़, निडर एवं संत कवि का जन्म लहरतारा के पास सन् १३९८ में ज्येष्ठ पूर्णिमा को हुआ. जुलाहा परिवार में पालन पोषण हुआ, संत रामानंद के शिष्य बने और अलख जगाने लगे. कबीर सधुक्कड़ी भाषा में किसी भी सम्प्रदाय और रूढ़ियों की परवाह किये बिना खरी बात कहते थे. कबीर ने हिंदू-मुसलमान सभी समाज में व्याप्त रूढ़िवाद तथा कट्टरपंथ का खुलकर विरोध किया. कबीर की वाणी उनके मुखर उपदेश उनकी साखी, रमैनी, बीजक, बावन-अक्षरी, उलटबासी में देखें जा सकते हैं. गुरु ग्रंथ साहब में उनके २०० पद और २५० साखियां हैं. 


काशी में प्रचलित मान्यता है कि जो यहॉ मरता है उसे मोक्ष प्राप्त होता है. रूढ़ि के विरोधी कबीर को यह कैसे मान्य होता. काशी छोड़ मगहर  चले गये और सन् १५१८ के आस पास वहीं देह त्याग किया. मगहर में कबीर की समाधि है जिसे हिन्दू मुसलमान दोनों पूजते हैं.


DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
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