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विरह की आग में जलते हुए

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विरह की आग में जलते हुए एक नज़ारा देखा,
हर कण में उसी के अक्स का चमकता सितारा देखा

खुली आँखों से देखी रूप बदलती ये दुनिया
हर गुज़रे अंजाम के पीछे उसका एक इशारा देखा

कहते हैं कर्मों से बदल सकते हैं तकदीर अपनी 
हमने तो तकदीर वालों को लेते उसी का सहारा देखा 

जिसने भी पिया है कामनाओं का सागर 
उसी मस्ताने को बनते इसी दुनिया का दुलारा देखा 

इश्क में डूब कर जिसने भी की इबादत 
सबके बीच में रहकर भी उसे सबसे नियारा देखा

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
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