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क्या है गौलोक धाम कैसा दिखाई देता है

  Views : 4723   Rating : 4.6   Voted : 14
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जब ये पृथ्वी दानवों असुरों के भार से पीड़ित हो गई तब गौ का रूप रखकर देवताओ के पास गई ,तब ब्रह्मा जी देवताओ को और शिव जी को लेकर,विष्णु जी के पास गए .तब भगवान विष्णु जी ने कहा - भगवान श्रीकृष्ण ही अगणित ब्रह्मांडो के स्वामी है,उन्की कृपा के बिना यह कार्य कदापि सिद्ध नहीं होगा,आप लोग उनके धाम ही शीघ्र जाओ

 

तब ब्रह्मा जी ने कहा - प्रभु ! आपके अतिरिक्त कोई दूसरा भी परिपूर्णतम तत्व है यह हम नहीं जानते यदि दूसरा कोई भी परमेश्वर है तो उनके लोक का मुझे दर्शन कराइए.तब भगवान विष्णु जी ने  सभी देवताओ को ब्रह्मांड शिखर पर विराजमान गौलोक धाम का मार्ग दिखलाया.

 

वामन जी के बाये पैर के अंगूठे से ब्रह्मांड के शिरोभाग का भेदन हो जाने पर जो छिद्र हुआ वह "ब्रहद्रव्"(नित्य अक्षय नीर ) से परिपूर्ण था. सब देवता उसी मार्ग से वहाँ के लिए नियत जलयान द्वारा बाहर निकले वहाँ ब्रह्मांड के ऊपर पहुँचकर उन सबने नीचे को ओर उस ब्रह्मांड को देखा इसके अतिरिक्त अन्य भी बहुत से ब्रह्मांड उसी जल में इन्द्रायण फल के सदृश इधर उधर लहरों में लुढक रहे थे, यह देखकर सब देवताओं को विस्मय हुआ वे चकित हो गए.

 

वहाँ से करोडो योजन ऊपर आठ नगर मिले जिनको चारो ओर दिव्य चाहरदीवारी शोभा बढ़ा  रही थी वही ऊपर  देवताओ ने विरजा नदी का सुन्दर तट देखा देवता उस उत्तम नगर में पहुँचे,जो अनन्तकोटि सूर्यो की ज्योति का महान पुंज जान पडता था, उसे देखकर देवताओ की आँखे चौधिया गई ओर वे उस तेज से पराभूत होकर जहाँ के तहां खड़े रह गए.

 

तब ब्रह्मा उस का ध्यान करने लगे. उसी ज्योति के भीतर उन्होंने एक परम शांतिमय साकार धाम देखा उसमे  परम अद्भुत कमलनाल के समान धवल-वर्ण हजारों मुख वाले शेष नाग का दर्शन करके सभी देवताओ ने उन्हें प्रणाम किया उन शेषनाग की गोद में महान "आलोकमय लोकवंदित गोलोकधाम" का दर्शन हुआ जहाँ धमाभिमानी देवताओ के ईश्वर और गणनाशीलो में प्रधान काल का भी कोई वश नहीं चलता. 

 

वहाँ माया अपना प्रभाव नहीं डाल सकती, मन, चित्त, बुद्धि, अहंकार, सोलह विकार और महतत्व भी वहाँ प्रवेश नहीं कर सकते. फिर तीनो गुणों के विषय में तो कहना ही क्या. वहाँ कामदेव के समान मनोहर रूप लावण्य शालिनी श्यामसुंदर विग्रहा श्रीकृष्ण पार्षदा द्वारपाल का कार्य करती थी. देवताओ के द्वार के भीतर जाने पर उन्होंने मना किया.

 

तब देवता बोले - हम सभी ब्रह्मा, विष्णु, शंकर, नाम के लोकपाल और इंद्र आदि देवता है. भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन करने आये है.

 

देवताओ की बात सुनकर उन सखियों ने जो द्वारापालिकाएँ थी अन्तः पुर जाकर सारी बात कह सुनाई तब एक सखी जो "शतचन्द्रनना" नाम से विख्यात थी. जिसके वस्त्र पीले थे, और जो हाथ में बेत की छड़ी लिए थी,उसने आने का प्रयोजन पूछा शतचन्द्रंनना  ने कहा - आप सब किस ब्रह्मांड के निवासी है बताईये ?

 

देवताओ ने कहा - बड़े आश्चर्य की बात है क्या अन्य भी ब्रह्मांड है हमने तो कभी नहीं देखा हम तो यही जानते है की एक ही ब्रह्मांड है ,दूसरा है ही नहीं.

 

शतचन्द्रंनना बोली - यहाँ तो "विरजा नदी" में करोडो ब्रह्मांड इधर-उधर लुढक रहे है. उनमे भी आप जैसे पृथक-पृथक देवता वास करते है. क्या आप लोग अपना नाम और गाँव नहीं जानते. जान पडता है कभी घर से बाहर नहीं निकले. जैसे गुलर के फलो में रहने वाले कीड़े जिस फल में रहते है, उसके सिवा दूसरे को नहीं जानते,उसी प्रकार आप जैसे साधारण जन जिसमे उत्पन्न होते है एक मात्र उसी को ब्रह्मांड समझते है.

 

विष्णु भगवान ने कहा- जिस ब्रह्मांड में विराट रूपधारी वामन के  नख से ब्रहमांड में विवर बन गया था हम वही के निवासी है

फिर शतचन्द्रं नना अंदर गई और शीघ्र ही वापस आकर भीतर आने की आज्ञा देकर चली गई.

 

"जय जय श्री राधे "


   

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
Comments
2021-02-07 00:52:58 By Ajay Nema

nice...

2011-11-07 17:30:52 By Dhananjay Mondal

jai radhe jai krishna jai vrindavan

2011-10-02 22:37:06 By Vandana Goel

shri radhey!

2011-08-20 22:25:02 By krishna bhandari

kya mere ko is post ka agla part ka link mil sakta hai jiske golok dham ke andar ke drishya ka varnan hai sri radhey

2011-08-12 23:58:23 By Ashish Rai

radhey radhey

2011-08-04 02:00:54 By Sameer Srivastava

jai shree krishna

2011-08-02 13:48:07 By Gopal

I seeking govend-krishna god .but i undestend god it is great file of god i have looking study for it .thank you god krishna...radha

2011-08-02 02:06:26 By Rajender Kumar Mehra

adbhut hai ye........radhe radhe

2011-07-01 04:12:14 By Prateek Sharma

radheradhe

2011-06-18 16:43:25 By Haripriya Dasi

राधे राधे, गौलोक धाम के अन्दर का द्रश्य इसी गौलोक धाम के अगले आर्टिकल में बताया गया है आप पढ़ सकते है.

2011-06-18 15:14:09 By Nikhil Kaushik

Kripa krke Golok andar se kaisa dikhai deta h yeh bhi bataein .. Jai Jai Shri Radhey

2011-06-17 01:24:46 By richa

very nice ....jai shree radhey

2011-05-27 16:50:15 By Supriya Sachin Shinde

hare krishna.............jai shree radhe radhe

2011-05-04 21:41:25 By aditya bansal

shree radhey

2011-05-02 18:39:39 By ??? ???????

जय जय श्री राधे !

2011-04-29 01:11:47 By radha charano ke das

राधे राधे,ऊपर दिया गया आर्टिकल, श्रीमन्ममहर्षि गर्गाचार्यप्रणीत श्री गर्ग सहिंता के गौलोक खंड से लिया गया है.जिसमे गर्गाचार्य जी ने बहुत ही सुन्दर गौलोक धाम का वर्णन किया है.राधे-राधे..

2011-04-28 23:15:19 By sanwariya

जय श्री कृष्णा अद्भुत है एसा पूर्व में न तो कहीं पढ़ा न सुना किस पुराण या ग्रन्थ में इन बातों का वर्णन है कृपया बताये मुझे सब कुछ जानने की इच्छा है

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