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एकादशी हरि भजन वृद्धि का दिन है

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 * एकादशी के दिन यदि अन्न खाया तो पाप लगेगा, यदि नही खाया तो पाप नहीं लगेगा, शायद पुण्य नहीं होगा, हाँ एकादशी माहात्मय अनुसार शायद फल मिले, वो भी सारी विधि करने पर. वैसे भी पाप और पुण्य तो हम बिना एकादशी वाले दिन भी करते है.कर सकते है.

वैष्णवों के लिए ये हरि भजन वृद्धि का दिन है अतः भोजन से वृत्ति हटाकर शरीर को हल्का रखकर, रोज से डबल या अधिक भजन करना, रात्रि जागरण करके नाम कीर्तन करना ही मुख्य उद्देश्य है.

 

* एकादशी में जो अन्न का विचार है वह पाप पुण्य से सम्बंधित है और भजन का जो विचार है वह भक्ति से सम्बंधित है जो केवल खाने न खाने पर केन्द्रित है उन्हें पाप पुण्य मिलेगा, भक्ति तो भजन से ही मिलेगी.


*
एकादशी श्री राधा रमण जी को अतिशय प्रिय है अतः जो भी भक्ति सहित श्री राधा रमण की प्रीति के लिए एकादशी का व्रत करता है उसका संसार बंधन निवृत हो जाता है इस व्रत से प्रभु की प्रीति और प्रसन्नता सम्पादित होती है. 


*
डिजिटल एकादशी -
मार्क्स निर्जल रहने  के,मार्क्स रोज से अतिरिक्त भजन 
के, मार्क्स  रात्रि जागरण कर संकीर्तन या जप के मार्क्स निषेध के, जैसे दिवाशयन,स्त्री संग आदि, मार्क्स उचित फलाहार करने के, कुल हम चैक करे, हम कितने मार्क्स प्राप्त कर रहे है, बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए. 

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
Comments
2018-12-19 12:47:48 By Unknwon

Shree Radhe

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एकादशी
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