Theme :
Home
Granth
eBook
Saint
Yatra
Shanka
Health
Pandit Ji

आमलकी एकादशी

  Views : 2454   Rating : 5.0   Voted : 1
Rate Article

आमलकी एकादशी व्रत "फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी" को किया जाता है. इस व्रत में आंवले के वृक्ष की पूजा करने का विधि-विधान है. इस व्रत में आंवले के पेड का पूजन किया जाता है. आंवले के वृ्क्ष के विषय में यह मत है, कि इसकी उत्पति भगवान श्री विष्णु के मुख से हुई है. एकादशी तिथि में विशेष रुप से श्री विष्णु जी की पूजा की जाती है. आंवले के पेड की उत्पति को लेकर एक कथा प्रचलित है.  

 

विष्णु जी के मुख से आंवले की उत्पति कैसे हुई?

 

विष्णु पुराण के अनुसार एक बार भगवान विष्णु के थूकने के फलस्वरुप उनके मुख से चन्दमा का जैसा एक बिन्दू प्रकट होकर पृ्थ्वी पर गिरा. उसी बिन्दू से आमलक अर्थात आंवले के महान पेड की उत्पति हुई. यही कारण है कि विष्णु पूजा में इस फल का प्रयोग किया जाता है.     

 

श्रीविष्णु के श्री मुख से प्रकट होने वाले आंवले के वृ्क्ष को सर्वश्रेष्ठ कहा गया है. इस फल के महत्व के विषय में कहा गया है, कि इस फल के स्मरणमात्र से गऊ दान करने के समान फल प्राप्त होता हे. यह फल भगवान विष्णु जी को अत्यधिक प्रिय है. इस फल को खाने से तीन गुणा शुभ फलों की प्राप्ति होती है. 

आमलकी एकादशी व्रत कथा

 

एक नगर था. इस नगर में सभी वर्गों के लोग मिलकर आनन्द पूर्वक रह्ते थें. लोगों का आपस में प्रेम होने के कारण धर्म और आस्था का निवास भी नगर में बना हुआ था. यह नगर चन्द्रवंशी नामक राजा के राज्य के अन्तर्गत आता था. उस राज्य में सभी सुखी थे, उस राज्य में विशेष रुप से श्री विष्णु जी की पूजा होती थी.

और एकादशी व्रत करने की प्रथा उस नगर में प्राचीन समय से चली आ रही थी. राजा और प्रजा दोनों मिलकर एकादशी व्रत में कुम्भ स्थापना करते थे. कुम्भ स्थापना के बाद धूप, दीप, नैवेद्य, पंचरत्न आदि से पूजा की जाती थी. 

 

एक बार एकादशी व्रत करने के समय सभी जन मंदिर में जागरण कर रहे थे. रात्रि के समय एक शिकारी आया जो भूखा था, और वह लगभग सभी पापों का भागी था. मंदिर में अधिक लोग होने के कारण शिकारी को भोजन चुराने का अवसर न मिल सका और उस शिकारी को वह रात्रि जागरण करते हुए बितानी पडी. प्रात:काल होने पर सब जन अपने घर चले गए. और शिकारी भी अपने घर चला गया. कुछ समय बीतने के बाद शिकारी कि किसी कारणवश मृ्त्यु हो गई. 

 

उस शिकारी ने अनजाने में ही सही क्योकि आमलकी एकादशी व्रत किया था, इस वजह से उसे पुण्य प्राप्त हुआ, और उसका जन्म एक राजा के यहां हुआ. वह बहुत वीर, धार्मिक, सत्यवादी और विष्णु भक्त था. दान कार्यो में उसकी रुचि थी. एक बार वह शिकार को गया और डाकूओं के चंगुल में फंस गया. डाकू उसे मारने के लिए शस्त्र का प्रहार करने लगे. राजा ने देखा की डाकूओं के प्रहार का उस पर कोई असर नहीं हो रहा है. 

 

और कुछ ऎसा हुआ की डाकूओं के शस्त्र स्वंय डाकूओं पर ही वार करने लगे. उस समय एक शक्ति प्रकट हुई, और उस शक्ति ने सभी डाकूओं को मृ्त्यु लोक पहुंचा दिया. राजा ने पूछा की इस प्रकार मेरी रक्षा करने वाला कौन है.? इसके जवाब में भविष्यवाणी हुई की तेरी रक्षा श्री विष्णु जी कर रहे है. यह कृ्पा आपके आमलकी एकादशी व्रत करने के प्रभावस्वरुप हुई है.

 

आमलकी एकादशी का महत्व 

 

एकादशी समस्त पापों का नाश करने वाली है. सौ गायों को दान में देने के उपरान्त जो फल प्राप्त होता है. वही फल आमलकी एकादशी का व्रत करने से प्राप्त होता है.

 

 

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
Comments
2011-03-16 19:13:34 By Dr. Prabhat Tiwari

बहुत ही सुन्दर जानकारी दी है आपने धन्यबाद जय श्री हरी !

Enter comments


 
एकादशी
Last Viewed Articles
eBook Collection
सभी किताबे
राधा संग्रह
ग्रन्थ
कृष्ण संग्रह
व्रज संग्रह
व्रत कथाएँ
यात्रा
DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
Copyright © radhakripa.in>, 2010. All Rights Reserved
You are free to use any content from here.