Theme :
Home
Granth
eBook
Saint
Yatra
Shanka
Health
Pandit Ji

निमाई के भाई निताई

  Views : 1221   Rating : 0.0   Voted : 0
Rate Article

क्रमशः से आगे ....

 

महाप्रभु गौरांगदेव का जन्म गौड़ देश के सुप्रसिद्ध नदिया नगर में हुआ। इनके पिता सिलहट निवासी मिश्र ब्राह्मण थे, माता नवदीप के सुप्रसिद्ध पंडित नीलाम्बर चक्रवर्ती की पुत्री थी। ये स्वयं दो भाई थे, बड़े भाई विश्वरूप इन्हें पाँच वर्ष का ही छोड़कर सदा के लिए चले गए। अपने माता पिता के एकमात्र यही पुत्र थे, इनकी माता के दूसरी कोई जीवित संतान ही विद्यमान नहीं थी।

श्री नित्यानंद (निताई) का जन्म राढ़ देश में हुआ। इनके माता पिता राढ़ी श्रेणी के ब्राह्मण थे। वे अपने सभी भाईयों में बड़े थे। किन्तु इनके छोटे भाइयों का कोई नाम भी नहीं जानता कि वे कौन थे और कितने थे ? ये गौरांग के बड़े भाई नाम से प्रसिद्ध हुए और गौर भक्तों में संकीर्तन के समय गौर से पहले निताई का ही नाम आता है।


भजो निताई गौर राधे श्याम। 

जपो हरे कृष्ण हरे राम।।

 

इनकी आत्मा एक ही तत्व की बनी हुई थी। इनका शरीर पृथक-पृथक देशीय होने पर भी इनका अन्तःकरण एक ही था, इसलिए निताई और निमाई दोनों भिन्न-भिन्न होते हुए भी अभिन्न समझे जाते हैं। प्रभु नित्यानंद का जन्म वीरभूमि जिले के अन्तर्गत (एकचाका) नामक एक छोटे से ग्राम में हुआ था, इनके ग्राम से थोड़ी दूरी पर मोडेश्वर (मयूरेश्वर) नाम का एक प्रसिद्ध शिवलिंग था। आजकल मयूरेश्वर नाम का एक ग्राम भी वहां बसा हुआ है, जो वीर भूमि का एक थाना है

नित्यानंद प्रभु के पिता का नाम हाडाई ओझा और माता का नाम पद्मावती देवी था। ओझा दम्पत्ति विष्णु भक्त थे। बिना भागवत् और सद् वैष्णव हुये उनके घर में नित्यानंद जैसे महापुरुष का जन्म हो ही कैसे सकता था ? उस समय सभी सम्प्रदायों के मानने वाले वैष्णव, स्मारत मतानुसार ही अपने को वैष्णव मानते थे। उपास्य देव तो उनके विष्णु ही होते थे, विष्णु पूजन को ही प्रधानता देते हुए वे अन्य देवताओं की भी समय-समय पर भक्ति भाव से पूजा किया करते थे। अस्तु हाडाई पंडित वैष्णव होते हुये भी नित्य प्रति मोडेश्वर में जाकर बडे भक्ति भाव से शिवजी की पूजा किया करते थे।


हाडाई पंडित के वंश में सदा से पुरोहित वृत्ति होती चली आई थी। इसलिए ये भी थोडी बहुत पुरोहिती कर लेते थे। घर में खाने पहनने की कमी नहीं थी, किन्तु इनका घर संतान के बिना सूना था, इसलिए ओझा दम्पत्ति को यही एक भारी दुख था। एक दिन पद्मावती देवी को स्वप्न में प्रतीत हुआ कि कोई महापुरुष कह रहे हैं देवि ! तुम्हारे गर्भ से एक ऐसे महापुरुष का जन्म होगा, जिनके द्वारा सम्पूर्ण देश में श्री कृष्ण संकीर्तन का प्रचार होगा और वे जगन्मान्य महापुरुष समझे जायेंगे। प्रायः देखा गया है कि सात्विक प्रकृति वाले पुरुषों को शुद्ध भाव से शयन करने पर रात्रि के अन्त में जो स्वप्न दीखते हैं, वे सच्चे ही होते हैं। भाग्यवती पद्मा देवी का स्वप्न भी सच्चा हुआ।


यथा समय उनके गर्भ रहा और शाके 1395 में माघ के शुक्लपक्ष में पद्मावती के गर्भ से एक पुत्र रत्न उत्पन्न हुआ। पुत्र का नाम रखा गया नित्यानंद। आगे चलकर ये ही नित्यानंद प्रभु अथवा (निताई) के नाम से गौर भक्तों में बलराम के समान पूजे गये और प्रसिद्ध हुये।

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
Comments
Enter comments


 
चैतन्य जीवनामृत
Last Viewed Articles
eBook Collection
सभी किताबे
राधा संग्रह
ग्रन्थ
कृष्ण संग्रह
व्रज संग्रह
व्रत कथाएँ
यात्रा
DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
Copyright © radhakripa.in>, 2010. All Rights Reserved
You are free to use any content from here.