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चैतन्य जीवनामृत

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महाप्रभु का प्रादुर्भाव विक्रम कि सोलहवी शताब्दी के मध्य भाग में हुआ और वे लगभग आधी शताब्दी तक इस धरा धाम पर विराजमान रहकर भावुक भक्तो को निरामय श्रीकृष्ण प्रेम पीयूष का पान कराते रहे. 

 

महाप्रभु गौरांग देव के पूर्वज हुआ है श्री हट्ट निवासी थे यह नगर आसाम प्रान्त में है और बंगाल से सटा हुआ है यहाँ भरद्वाज वंशी परम धार्मिक और विद्वान उपेन्द्र मिश्र नाम के एक तेजस्वी और कुलीन ब्राह्मण निवास करते थे उनके सात पुत्र थे जिनमे से एक जगन्नाथ थे इनके यहाँ गौराग प्रभु का जन्म हुआ ये पढ़ने के लिए सिलहट (श्री हट्ट)से नवद्वीप में आये. 

यहाँ जगन्नाथ मिश्र पंडित गंगादासजी कि पाठशाला में अध्ययन करने लगे यही नवद्वीप निवासी नीलाम्बर चक्रवर्ती ने अपने ज्येष्ठ कन्या शची देवी का इनसे विवाह कर दिया ये माया पुर में घर बनाकर रहने लगे. मायापुर नवद्वीप का ही एक मुहल्ला है. 

 

प्राचीन नवद्वीप कि परिधि १६ कोस कि थी उसमे अन्तःद्वीप, सीमांन्तद्वीप, गोद्रुमद्वीप, मध्यद्वीप  और रूद्रद्वीप, ऋतुद्वीप, जन्हुद्वीप, मोद्द्र्मद्वीप, कोलद्वीप,इन नवो को मिलाकर ही नवद्वीप कहते थे.शाके १४०७ (स.१५४२ विक्रमी)के फाल्गुन की पूर्णिमा का शुभ दिन महाप्रभु का जन्म हुआ सब बालक ९ महीने गर्भ में रहते है किन्तु गौरांग पुरे १३ महीने गर्भ में रहे थे.

शची देवी के सखियों ने गौरांग का नाम 'निमाई' रखा बहुतो का यह मत है कि इनका प्रसवग्रह एक नीम के वृक्ष के नीचे था इसलिए इनका नाम निमाई रखा गया.इनके दो विवाह हुए थे पहली पत्नी का नाम लक्ष्मी था उनके परलोक गमन के बाद इनका दूसरा विवाह विष्णुप्रिया जी के साथ हुआ.

 

एक बार जब ये अपने पिता के श्राद्ध के लिए गया जी गए थे तब उन्हें वहाँ श्री ईश्वरपुरी जी मिले जिन्होंने इनके कानो में गोपिजनवल्ल्भाय नमः इस दशाक्षर मंत्र का उपदेश कर दिया सुनते ही ये मूर्च्छित हो गए. ईश्वरपुरी जी इन्हें दीक्षा देकर कहाँ गए किसी को पता नहीं चला.

 

आगे जब इन्होने संन्यास लिया तो संन्यास कि दीक्षा भारती महाराज से ली तब इनका नाम चैतन्य रखा गया . आगे ये १८ वर्ष तक जगन्नाथ पूरी में रहे वृंदावन कि यात्रा भी की और पुरे भारत का भ्रमण भी किया. यात्रा में नित्यानंद जी, अद्वैताचार्य जी, गदाधर जी श्री वास, आदि बहुत से भक्तो से भेट हुई. अद्वैताचार्य जी इनके बड़े भाई के अध्यापक थे.

 

हरि नाम का संकीर्तन श्री चैतन्य महाप्रभु ने ही शुरू किया.

                                "हरे कृष्णा, हरे कृष्णा , कृष्णा-कृष्णा, हरे-हरे  

                                      हरे-राम, हरे-राम, राम-राम, हरे-हरे"

 

श्री चैतन्य महाप्रभु जी का परिचय या उनके बारे में कुछ भी लिखना हमारे जैसे तुच्छ जीवो के बस की बात नहीं है फिर भी हम जो भी थोडा बहुत लिखने की कोशिश कर रहे है उसमे त्रुटियाँ भी बहुत होगी उन सब के लिए हम क्षमा प्रार्थी है.

 

DISCLAIMER:Small effort to expression what ever we read from our scripture and listened from saints. We are sorry if this hurts anybody because information is incorrect in any context.
!! जय जय श्री राधे !!
Comments
2019-05-17 23:33:31 By Unknwon

y

2019-05-16 14:01:04 By Unknwon

kya sabi hindu ved grath aur santo ka chritr ish page pa padna ko milaygy kya

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